RSS प्रमुख भागवत क्यों बोले- भारत में भी हो रही बांग्लादेश-फ्रांस जैसे हालात बनाने की कोशिश
विजयादशमी उत्सव में संघ प्रमुख ने हिंदू समाज की एकता, आंदोलनों के उद्देश्य और देश के विभाजन का किया जिक्र, कहा- देश को दबाना चाहती हैं बाहरी ताकतें

न्यूज डेस्क, 20 अक्टूबर 2026:
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मंगलवार को महाराष्ट्र के नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में विजयादशमी उत्सव के दौरान देश की एकता, सामाजिक आंदोलनों और बाहरी शक्तियों की भूमिका को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारत में भी बांग्लादेश और फ्रांस जैसे हालात बनाने की कोशिश हो रही है। दुनिया में ऐसी शक्तियां मौजूद हैं, जो भारत को दबाना चाहती हैं। उनका उद्देश्य सत्ता परिवर्तन के जरिए हालात सुधारना नहीं बल्कि अपनी पसंद के लोगों को सत्ता में बैठाना है। भागवत ने आरोप लगाया कि कुछ लोग भारत और हिंदू समाज को बांटना चाहते हैं और उन्हें ऐसे नेताओं का भी समर्थन मिलता है।

‘आंदोलन समाधान के लिए हों, समाज में विभाजन के लिए नहीं’
संघ प्रमुख ने कहा कि समस्याओं के समाधान के लिए आंदोलन होना स्वाभाविक है लेकिन उनका उद्देश्य समाज में द्वेष और विभाजन पैदा करना नहीं होना चाहिए। उन्होंने आगाह किया कि कई बार आंदोलनों का इस्तेमाल दूसरे उद्देश्यों के लिए किया जाता है और वे राजनीति का साधन बन जाते हैं। उनके मुताबिक समाज और देश को केवल नेता ही नहीं चलाते हैं। समाज की सक्रियता भी समस्याओं के समाधान में अहम भूमिका निभाती है।
‘एकता कायम रही तो कोई नहीं बिगाड़ सकेगा हमारा कुछ’
भागवत ने कहा कि बाहरी शक्तियों के प्रभाव में आकर देशवासियों को उत्तेजित होने के बजाय एकजुट रहना चाहिए। उन्होंने बंगाल विभाजन का उदाहरण देते हुए कहा कि लॉर्ड कर्जन ने हिंदू-मुस्लिम आधार पर बंगाल का विभाजन किया था जिसे चार साल बाद वापस लेना पड़ा। इसके विपरीत 1947 में देश का विभाजन नहीं रोका जा सका क्योंकि लोगों के मन में यह धारणा घर कर गई थी कि अलग दिखने वाले लोग अलग ही हैं।
उन्होंने कहा कि सभी के पूर्वज एक हैं और भारतीय संस्कृति का मूल भी एक है। किसी की अलग पहचान मिटाए बिना सबको साथ लेकर चलना जरूरी है। भागवत के मुताबिक भारत की परंपराओं और विचारों में दुनिया की समस्याओं का समाधान देने की क्षमता है।
विकास में प्रकृति और नैतिकता का भी रखें ध्यान
संघ प्रमुख ने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन पर भी जोर दिया। नेपाल में बाढ़ का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि विकास के लिए तकनीक को बढ़ावा देना जरूरी है लेकिन इससे प्रकृति को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। विकास की प्रक्रिया में अर्थव्यवस्था के साथ पर्यावरण और नैतिक मूल्यों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
OTT पर नियम और AI के जिम्मेदार इस्तेमाल पर जोर
भागवत ने डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताते हुए कहा कि लोगों तक हर तरह की जानकारी पहुंच रही है लेकिन सही-गलत का आकलन किए बिना उसका इस्तेमाल नुकसानदेह हो सकता है। उन्होंने ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म के लिए नियम तय करने और इस दिशा में सरकार व प्रशासन की सक्रियता पर जोर दिया। इसके साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का सही और जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने की जरूरत बताई।

मालूम हो कि आरएसएस विजयादशमी पर अपना स्थापना दिवस मनाता है। वर्ष 1925 में इसी दिन संगठन की स्थापना हुई थी। कार्यक्रम में मोहन भागवत ने शस्त्र पूजन भी किया। इस मौके पर पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और उनकी पत्नी डॉ. सुदेश धनखड़, इजराइल के काउंसल जनरल यानिव रेवाच, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी समेत कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।






