लखनऊ, 16 फरवरी 2026:
यूपी विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट पर सोमवार को चर्चा शुरू होते ही पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत का मुद्दा केंद्र में आ गया। विपक्ष ने सरकार की नई पर्यटन नीति, प्रमुख स्थलों के विकास और दीर्घकालिक रणनीति पर सवाल उठाए तो सरकार ने आंकड़ों के जरिए अपने कामकाज का बचाव किया। सदन में सपा के विधायक कमाल अख्तर और नफीस अहमद ने देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों की स्पष्ट जानकारी मांगी।
जवाब में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि सरकार ने पूरे प्रदेश को 12 पर्यटन सर्किटों में बांटकर समग्र विकास की रणनीति अपनाई है। इनमें रामायण, कृष्ण-ब्रज, बौद्ध, महाभारत, शक्तिपीठ, आध्यात्मिक, सूफी-कबीर, जैन, बुंदेलखंड, इको टूरिज्म, वन्यजीव एवं पर्यावरण, शिल्प और स्वतंत्रता संग्राम सर्किट शामिल हैं। मंत्री के अनुसार इन सर्किटों का गठन किसी एक धर्म या वर्ग के लिए नहीं बल्कि प्रदेश की बहुसांस्कृतिक विरासत को सामने लाने के उद्देश्य से किया गया है।
मंत्री ने बताया कि वर्ष 2022 से 2025-26 के बीच बौद्ध धर्म से जुड़े 43, जैन धर्म से संबंधित 30, वाल्मीकि समाज के 6, रविदास समाज के 19, रैदास समाज के 1, कबीर पंथ के 7, गुरुद्वारों के 9 और डॉ. भीमराव अंबेडकर की स्मृति से जुड़ी 5 परियोजनाओं सहित कुल 110 पर्यटन परियोजनाएं स्वीकृत कर पूरी की गई हैं।
उन्होंने पिछली सरकार से तुलना करते हुए कहा कि वर्ष 2017 में पर्यटन क्षेत्र के लिए सिर्फ 24 परियोजनाएं और 109 करोड़ रुपये का प्रावधान था जबकि वर्तमान सरकार ने 2024-25 में 1734.31 करोड़ रुपये का बजट रखा है। इस अवधि में 366 परियोजनाएं स्वीकृत की गईं। उन्हें समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है।
कनेक्टिविटी पर जोर देते हुए मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर धार्मिक और पर्यटन स्थलों को जोड़ने के लिए धर्मार्थ कार्य विभाग से 1000 करोड़ रुपये अलग से स्वीकृत किए गए हैं। सदन में कमाल अख्तर का नाम लेते हुए उन्होंने कहा कि उनके क्षेत्र में भी विकास कार्य हुए हैं। 2020-21 में 50 लाख रुपये की राशि दी गई। ग्राम ढाकी के प्राचीन शिव मंदिर के लिए 91 लाख और भोजीपुरा के मोइनी मंदिर के विकास हेतु 150 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।
बजट बहस के दौरान जहां विपक्ष नीति की पारदर्शिता और प्राथमिकताओं पर सवाल उठाता दिखा वहीं सरकार ने बड़े बजट और परियोजनाओं के आंकड़ों से अपने दावे मजबूत किए। 2026-27 के बजट सत्र में पर्यटन विकास आर्थिक एजेंडा होने के साथ सियासी बहस का भी बड़ा मुद्दा बन गया है।






