वाराणसी, 4 अप्रैल 2026:
सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित भव्य महानाट्य का शुभारंभ काशी की पावन धरा पर हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे भारतीय सांस्कृतिक एकता का सशक्त प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन पीएम मोदी की एक भारत-श्रेष्ठ भारत की अवधारणा को साकार करता है। उज्जैन व काशी जैसे दो प्राचीन सांस्कृतिक केंद्रों को एक सूत्र में पिरोता है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि मां गंगा के तट पर बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी और महाकाल की नगरी उज्जैन का यह संगम भारत की समृद्ध परंपराओं को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इस आयोजन के लिए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, सांस्कृतिक विभाग और कलाकारों का आभार व्यक्त किया।
सीएम योगी ने काशी और उज्जैन के ऐतिहासिक व आध्यात्मिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि जैसे राम-लक्ष्मण और कृष्ण-बलराम की जोड़ियां प्रसिद्ध हैं वैसे ही नाथ संप्रदाय में संत भर्तृहरि और सम्राट विक्रमादित्य की जोड़ी भी विशेष महत्व रखती है। उन्होंने बताया कि जहां विक्रमादित्य की कर्मस्थली उज्जैन रही वहीं भर्तृहरि की साधनास्थली काशी रही है। चुनार किले के संरक्षण और सौंदर्यीकरण का कार्य भी इसी विरासत को सहेजने का प्रयास है।
मुख्यमंत्री ने भारतीय कालगणना की परंपरा को रेखांकित करते हुए कहा कि काशी और उज्जैन का यह मिलन देश की वैज्ञानिक और सांस्कृतिक धरोहर को विश्व पटल पर स्थापित करेगा। उन्होंने 2014 के बाद पारंपरिक ज्ञान, योग और आयुष के वैश्विक प्रसार का भी उल्लेख किया।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि यह नाट्य प्रस्तुति केवल मनोरंजन नहीं बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, पराक्रम, दानवीरता और सुशासन जैसे मूल्यों से जोड़ने का माध्यम है। उन्होंने सिनेमा और कला जगत से भी सकारात्मक चरित्रों को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
कार्यक्रम को उन्होंने भारतीय सांस्कृतिक धरोहर के पुनर्जीवन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन युवा पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएंगे।






