हरदोई/सीतापुर, 10 मार्च 2026:
ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध शंखनाद यात्रा का हरदोई और सीतापुर में श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ स्वागत किया। यात्रा सोमवार को सीतापुर के प्राचीन तीर्थ नैमिषारण्य पहुंची, जहां विभिन्न धार्मिक स्थलों पर पूजन-अर्चन के कार्यक्रम हुए। यह यात्रा मंगलवार को इटौंजा के रास्ते राजधानी लखनऊ की सीमा में प्रवेश करेगी।
सोमवार शाम शंकराचार्य की धर्मयात्रा उन्नाव और हरदोई की सीमाओं से होते हुए नैमिषारण्य पहुंची। यहां व्यास आश्रम की ओर से उनका स्वागत किया गया। इसके बाद यात्रा प्रसिद्ध ललिता देवी मंदिर पहुंची, जहां शंकराचार्य ने विधि-विधान से पूजन किया।
शाम को वह चक्रतीर्थ पहुंचे और वहां पूजा-अर्चना कर आरती में शामिल हुए। तीर्थ क्षेत्र में सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए थे। चक्रतीर्थ में पूजा के बाद यात्रा परमार्थ धाम आश्रम पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने शंकराचार्य की पादुका पूजन किया। सूर्यास्त के बाद मौन धारण करने की परंपरा के कारण शंकराचार्य ने मीडिया से बातचीत नहीं की।

इससे पहले हरदोई में उन्होंने गौ संरक्षण और संत समाज के सम्मान से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण और गौ भारतीय परंपरा की सृजनात्मक व्यवस्था के प्रतीक हैं और इनकी रक्षा समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने पशुधन की घटती संख्या पर भी चिंता जताते हुए कहा कि पिछली पशु गणना की तुलना में इस बार करीब 20 लाख पशुओं की कमी दर्ज की गई है, जो गंभीर विषय है। उन्होंने समाज और सरकार से गौवंश और संत परंपरा की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया।
बता दें कि इस यात्रा की शुरुआत 7 मार्च को वाराणसी के केदार घाट पर गंगा पूजन के साथ हुई थी। शंकराचार्य ने गौ माता को राज्य माता का दर्जा देने और गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग को लेकर इस अभियान की शुरुआत की है। यात्रा 7 मार्च को जौनपुर होते हुए रायबरेली पहुंची। इसके बाद 8 मार्च को रायबरेली लालगंज और अचलगंज होते हुए उन्नाव व 9 मार्च को उन्नाव से बांगरमऊ और बघौली में सभाओं के बाद यात्रा नैमिषारण्य पहुंची, जहां रात्रि विश्राम किया गया। मंगलवार को यात्रा नैमिषारण्य से सिधौली और इटौंजा में सभाएं करते हुए लखनऊ की सीमा में प्रवेश करेगी। लखनऊ में इस अभियान का मुख्य कार्यक्रम 11 मार्च को आशियाना स्थित कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल, पासी किला चौराहा पर आयोजित किया जाएगा।






