Uttar Pradesh

शंकराचार्य की गऊ रक्षा अभियान यात्रा आज से… 11 मार्च को लखनऊ में धर्मादेश

वाराणसी में गंगा पूजन के साथ लिया संकल्प, जौनपुर, सुल्तानपुर, रायबरेली होते हुए राजधानी पहुंचेगी यात्रा

श्रीकांत उपाध्याय

वाराणसी, 7 मार्च 2026:

ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की गऊ रक्षा अभियान यात्रा आज 7 मार्च से शुरू हो रही है। इससे पूर्व यात्रा का शंखनाद वाराणसी के केदार घाट पर गंगा पूजन के साथ किया गया। इस दौरान शंकराचार्य ने गऊ रक्षा का संकल्प दोहराते हुए कहा कि गऊ माता को राज्य माता का दर्जा देने और गऊ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग को लेकर यह अभियान शुरू किया जा रहा है।

शंकराचार्य ने बताया कि सरकार को इस संबंध में 40 दिन का समय दिया गया था, लेकिन 35 दिन बीत जाने के बाद भी कोई संदेश नहीं मिला। इसके बाद गंगा तट पर पूजन कर गऊ प्रतिष्ठा धर्म युद्ध का संकल्प लिया गया और यात्रा शुरू करने की घोषणा की गई।

उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती के अवसर पर गऊ रक्षा का संकल्प लिया गया है। शिवाजी महाराज ने सबसे पहले गऊ रक्षा की बात उठाई थी और उन्हीं की प्रेरणा से इस अभियान की शुरुआत की जा रही है।

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तय कार्यक्रम के अनुसार शंकराचार्य शनिवार सुबह 7:30 बजे श्री विद्या मठ से प्रस्थान करेंगे। इसके बाद काशी के प्रसिद्ध संकटमोचन मंदिर में संकटमोचन हनुमानाष्टक, हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ किया जाएगा। पूजा के बाद यात्रा जौनपुर के लिए रवाना होगी।

यह रहेगा यात्रा का कार्यक्रम

विद्या मठ की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार यात्रा कई जिलों से होते हुए लखनऊ पहुंचेगी और जगह-जगह जनसभाएं भी आयोजित की जाएंगी।

7 मार्च- जौनपुर और सुल्तानपुर में सभा के बाद रायबरेली में जनसभा

8 मार्च- रायबरेली से मोहनलालगंज, लालगंज और अचलगंज में सभाएं करते हुए उन्नाव में रात्रि विश्राम

9 मार्च- उन्नाव से बांगरमऊ और बघौली में सभाओं के बाद नैमिषारण्य में रात्रि विश्राम

10 मार्च- नैमिषारण्य से सिधौली और इटौंजा में सभाएं करते हुए लखनऊ सीमा में प्रवेश

11 मार्च को गऊ रक्षा अभियान यात्रा का मुख्य कार्यक्रम लखनऊ में आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम शीतला अष्टमी के दिन कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल, पासी किला चौराहा, आशियाना में होगा। दोपहर 2:15 बजे शंकराचार्य के आगमन के बाद कार्यक्रम शुरू होगा और शाम 5 बजे तक धर्मादेश जारी किया जाएगा। इसमें गऊ संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर आगे की रणनीति घोषित की जाएगी।

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