लखनऊ, 5 जनवरी 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ के हजरतगंज स्थित मोती महल लॉन में सोमवार को सिन्धी समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इसमें समाज ने अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं को सहेजने व आगे बढ़ाने को लेकर कई अहम निर्णय लिए। बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया कि सिन्धी भाषा के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए अब युवा वर्ग को घर-घर में सिन्धी सीखना अनिवार्य किया जाएगा। साथ ही यह भी संकल्प लिया गया कि सिन्धी समाज के प्रत्येक प्रतिष्ठान, कार्यालय और निजी वाहनों पर भगवान झूलेलाल जी की तस्वीर अनिवार्य रूप से लगाई जाएगी।
बैठक में मौजूद लोगों ने संकल्प लिया कि लखनऊ का सिन्धी समुदाय अब घरों में ही नहीं बल्कि मोबाइल फोन पर भी आपस में सिन्धी या अपनी मातृभाषा में ही संवाद करेगा। इस अवसर पर बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई।
इसके साथ ही आगामी 26 जनवरी को आयोजित होने वाले सिन्धी भाषा एवं संस्कृति उत्सव को लेकर भी चर्चा की गई। निर्णय लिया गया कि यह आयोजन परिवार सहित पूरे उत्साह, उल्लास और भव्यता के साथ मनाया जाएगा। मोती महल वाटिका के रिची रिच लॉन में होने वाले इस कार्यक्रम में अलवर (राजस्थान) की शहनाई की मधुर धुनों के साथ सिन्धी संस्कृति और भाषा को युवाओं तक पहुंचाया जाएगा। कार्यक्रम में सिन्धी वेशभूषा में सबसे अच्छे पारंपरिक पहनावे को सम्मानित कर पुरस्कृत किया जाएगा, वहीं समाज के उत्कृष्ट कार्य करने वाले चुनिंदा लोगों को भी सम्मान प्रदान किया जाएगा।
26 जनवरी को कार्यक्रम की शुरुआत दोपहर 12 बजे देशभक्ति गीतों के साथ ध्वजारोहण से होगी। इसके बाद ढोल-नगाड़ों और शहनाई की धुन पर सिन्धी महिलाएं और पुरुष डांडिया व भांगड़ा नृत्य करेंगे और पारंपरिक स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद लेंगे। बैठक में हरिओम मंदिर व चेट्टी चंद मेला कमेटी के पदाधिकारियों सहित समाज के प्रमुख लोग मौजूद रहे। उनमें राम बालानी, कृष्णचंद बमबानी, जेपी नागपाल, नानक चंद लखमानी, मेला कमेटी प्रवक्ता अशोक मोतियानी, अध्यक्ष रतन मेघानी, संरक्षक अशोक चांदवानी, महामंत्री संजय जसवानी सहित कई सदस्य शामिल थे।






