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UP में निवेश को नई रफ्तार: टाटा समूह इलेक्ट्रिक वाहनों की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को देगा विस्तार

सीएम योगी और एन चंद्रशेखरन की बैठक में ईवी, ऊर्जा और रोजगार पर व्यापक मंथन, परिवहन क्षेत्र को मजबूती के साथ युवाओं के लिए पैदा होंगे रोजगार के नए अवसर

लखनऊ, 16 दिसंबर 2025:

यूपी में औद्योगिक निवेश, स्वच्छ ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) क्षेत्र को नई दिशा देने के उद्देश्य से सीएम योगी आदित्यनाथ और टाटा सन्स के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के बीच एक अहम बैठक हुई। इस बैठक में प्रदेश में टाटा समूह द्वारा संचालित परियोजनाओं की प्रगति के साथ-साथ भविष्य के निवेश प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक के दौरान एन चंद्रशेखरन ने मुख्यमंत्री को बताया कि टाटा मोटर्स उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को लगातार विस्तार दे रहा है। ईवी के नए मॉडलों के विकास पर तेजी से कार्य चल रहा है। इससे प्रदेश ई-मोबिलिटी के क्षेत्र में एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर सकता है। उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रिक बसों सहित अन्य ईवी वाहनों के उत्पादन के विस्तार से न केवल परिवहन क्षेत्र को मजबूती मिलेगी बल्कि युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

ऊर्जा क्षेत्र में टाटा समूह की भूमिका को रेखांकित करते हुए एन चंद्रशेखरन ने बताया कि टाटा पावर प्रयागराज के बारा प्लांट में 1,900 मेगावाट क्षमता की थर्मल पावर यूनिट का संचालन कर रहा है। यह परियोजना प्रदेश की बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में सोलर पावर परियोजनाओं के विकास को भी तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।

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टाटा पावर सोलर द्वारा प्रयागराज और बांदा में 50-50 मेगावाट क्षमता की दो सौर ऊर्जा परियोजनाएं सफलतापूर्वक संचालित की जा रही हैं। इसके अलावा प्रदेश के सभी 75 जनपदों में सोलर रूफटॉप परियोजनाओं के माध्यम से स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह पहल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सतत विकास की अवधारणा के अनुरूप है। कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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सीएम योगी ने टाटा समूह के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश निवेश के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान कर रहा है। राज्य सरकार उद्योग, ऊर्जा एवं हरित प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है। बैठक को प्रदेश के औद्योगिक और आर्थिक विकास की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

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