लखनऊ, 13 फरवरी 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ में यूजीसी नियमावली को लागू करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन थम नहीं रहा है। शुक्रवार को लखनऊ विश्वविद्यालय गेट पर यूजीसी के समर्थन में विभिन्न छात्र संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया। वे ‘समता संवर्धन मार्च’ निकालने की तैयारी कर रहे थे लेकिन उससे पहले ही पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोक लिया। मौके पर भारी पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स की तैनाती की गई थी। छात्रों का आरोप है कि उन्हें गेट से बाहर नहीं निकलने दिया गया। जमीन पर बैठने के बाद घसीटकर वाहनों में बैठाया गया और बलपूर्वक कार्रवाई की गई।
प्रदर्शन में समाजवादी छात्र सभा, आइसा, एनएसयूआई, एससीएस, बीएएसएफ, एसएफआई, बाप्सा, अंबेडकरवादी विद्यार्थी संघ सहित करीब एक दर्जन संगठनों के सैकड़ों छात्र शामिल थे। छात्रों का कहना था कि उनका आंदोलन यूजीसी के उन नए नियमों के समर्थन में है जिन पर हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगाई है। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक नए नियमों का उद्देश्य विश्वविद्यालयों में समानता और भेदभाव के खिलाफ प्रभावी व्यवस्था बनाना है।

प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालयों में आज भी जाति के आधार पर भेदभाव होता है। उन्होंने कहा कि कुछ वर्षों में एससी-एसटी और ओबीसी वर्ग के छात्रों की मौतों के मामलों ने कैंपसों में मौजूद असमानता को उजागर किया है। रोहित वेमुला का हवाला देते हुए छात्रों ने दावा किया कि ऐसे मामलों से यह स्पष्ट होता है कि संस्थानों में संरचनात्मक भेदभाव मौजूद है। कुछ छात्रों ने चिकित्सा संस्थानों में कथित तौर पर जातिगत आधार पर अंक काटने के आरोप भी लगाए।
छात्रों का कहना है कि समिति ने छात्रों के हित में आगे बढ़ने की बात कही थी लेकिन अब नए नियमों पर रोक से सुधार की प्रक्रिया बाधित हो रही है। एक प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि विरोध करने वालों को प्रशासनिक सहयोग मिलता है जबकि समर्थन में आवाज उठाने पर पुलिस कार्रवाई होती है। छात्रों ने डीएम के ज्ञापन लेने न आने पर भी नाराजगी जताई।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। छात्रों का आरोप है कि उनके साथ अभद्रता की गई और शांतिपूर्ण मार्च की अनुमति नहीं दी गई। उधर, पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और भीड़ नियंत्रित करने की बात कही। शाम तक परिसर में तनाव का माहौल बना रहा जबकि छात्र संगठनों ने आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है।







