लखनऊ, 22 जनवरी 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ के हजरतगंज चौराहे पर गुरुवार को समाजवादी छात्र सभा और नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन मणिकर्णिका घाट पर कथित तौर पर मूर्तियां तोड़े जाने और संभल मामले में जज के ट्रांसफर के विरोध में किया गया। प्रदर्शन के दौरान माहौल उस वक्त तनावपूर्ण हो गया जब पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच जमकर धक्का-मुक्की और नोकझोंक शुरू हो गई।
प्रदर्शनकारी हाथों में संविधान की किताब लेकर पहुंचे थे। उस पर ताला लगा हुआ था। उनका आरोप था कि प्रदेश सरकार संविधान और सनातन परंपराओं के खिलाफ काम कर रही है। कार्यकर्ताओं ने प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। हालात बिगड़ते देख हजरतगंज चौराहे पर कई थानों की पुलिस फोर्स के साथ आरएएफ के जवानों को तैनात किया गया।

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की। इस दौरान कई कार्यकर्ताओं को पकड़कर बसों में बैठाया गया। आरोप है कि कुछ प्रदर्शनकारियों को टांगकर बस के अंदर ले जाया गया। इस दौरान धक्का-मुक्की में उनके कपड़े भी फट गए। कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।
एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि संभल में जज का ट्रांसफर सरकार के दबाव में किया गया है। उन्होंने कहा कि आरोपी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करने वाले जज के खिलाफ कार्रवाई शर्मनाक है। यह लोकतंत्र के मूल्यों के खिलाफ है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि प्रदेश सरकार आरोपी पुलिसकर्मियों के बचाव में उतर आई है। इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

प्रदर्शनकारियों ने मणिकर्णिका घाट पर मूर्तियां तोड़े जाने के मामले में सरकार से सार्वजनिक माफी की मांग की और जज के ट्रांसफर को तत्काल रद्द करने की अपील की। पुलिस हिरासत के बावजूद प्रदर्शनकारियों का आक्रोश देर तक बना रहा।






