Uttarakhand

डीम्ड यूनिवर्सिटी सम्मेलन : वन संरक्षण में स्थानीय लोगों को मिले प्राथमिकता, मंत्री बोले- बनानी होंगी जनहितैषी नीतियां

सुबोध उनियाल सहित अन्य विशेषज्ञों ने जंगलों को बचाने की मुहिम पर चर्चा की, वैज्ञानिक दृष्टिकोण व तकनीकी नवाचार से प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर प्रबंधन संभव

राजकिशोर तिवारी

देहरादून, 20 अक्टूबर 2026:

वन मंत्री सुबोध उनियाल ने उत्तराखंड में वन संरक्षण और पर्वतीय क्षेत्रों की समृद्धि को एक-दूसरे का पूरक बताया। उन्होंने कहा कि जंगलों को बचाने की मुहिम में स्थानीय लोगों की भागीदारी और उनकी आजीविका को प्राथमिकता देनी होगी। वन संरक्षण तभी प्रभावी और टिकाऊ हो सकता है, जब जंगलों पर निर्भर रहने वाले लोगों के हितों की रक्षा हो और उन्हें विकास की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाया जाए।

ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में पर्वतीय क्षेत्रों की पर्यावरणीय चुनौतियों पर आयोजित सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि पर्वतीय पर्यावरण की रक्षा के लिए ऐसी जनहितैषी नीतियां तैयार करनी होंगी, जो प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में भी सुधार लाएं। उन्होंने भूमि की उत्पादकता बढ़ाने, आधुनिक तकनीक अपनाने और हाईटेक उपकरणों के इस्तेमाल पर जोर देते हुए कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तकनीकी नवाचार से प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर प्रबंधन संभव है।

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सटीक आंकड़ों के बिना पर्यावरणीय नीतियां बनाना चुनौतीपूर्ण

ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. नरपिंदर सिंह ने पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्बन फुटप्रिंट से जुड़े सटीक और विश्वसनीय आंकड़ों की उपलब्धता को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि कार्बन उत्सर्जन और पर्यावरण पर उसके प्रभाव का सही आंकलन किए बिना प्रभावी नीतियां और व्यावहारिक समाधान तैयार करना चुनौतीपूर्ण है। पर्यावरणीय समस्याओं से निपटने के लिए वैज्ञानिक आंकड़ों और प्रमाण आधारित नीतियों पर विशेष ध्यान देना होगा।

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वनों की आग और मानव-वन्यजीव संघर्ष बड़ी चुनौती

ग्राफिक एरा के सेंटर फॉर हिमालयन स्टडीज के चेयर प्रोफेसर एवं एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. एसपी सिंह ने उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ती पर्यावरणीय चुनौतियों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वनों की आग और मानव-वन्यजीव संघर्ष गंभीर समस्याओं के रूप में सामने आ रहे हैं। इनसे निपटने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने के साथ स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना जरूरी है।

वन पंचायतों को मजबूत करने पर जोर

यूकॉस्ट के एमेरिटस साइंटिस्ट डॉ. जीसीएस नेगी ने कहा कि उत्तराखंड में वन पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण और उसके लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचाने में वन पंचायतों की अहम भूमिका है। वन पंचायतों को सशक्त बनाकर प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर प्रबंधन किया जा सकता है। इससे ग्रामीण आजीविका को मजबूती मिलने के साथ वन संरक्षण के प्रयासों को भी प्रभावी बनाया जा सकेगा।सम्मेलन में प्रो-वाइस चांसलर डॉ. संतोष एस. सर्राफ, विभागाध्यक्ष डॉ. प्रतिभा नैथानी, डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा, डॉ. अर्चना बचैती, डॉ. सुमन नैथानी, डॉ. रचन कर्माकर, डॉ. दीप्ति, डॉ. स्वाति, बरखा, श्वेता, आशीष सहित अन्य शिक्षक व छात्र मौजूद रहे।

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Anurag Chaturvedi

अनुराग चतुर्वेदी पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता, लेखन और संपादन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। उन्होंने विभिन्न प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए खबरों को निष्पक्षता और गहराई के साथ जनता के सामने रखा है।

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