लखनऊ, 6 अप्रैल 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ के इको गार्डन में सोमवार को उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ‘एकजुट’ के बैनर तले प्रदेशभर से आए सैकड़ों शिक्षकों ने जोरदार प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने शिक्षा सेवा चयन आयोग के नियमों में सेवा सुरक्षा की धारा बहाल करने सहित 25 मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की।
प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने आरोप लगाया कि शिक्षा सेवा चयन बोर्ड से आयोग बनने के बाद उनकी सेवा सुरक्षा खत्म कर दी गई है। इससे विद्यालय प्रबंधकों को मनमानी करने की खुली छूट मिल गई है। शिक्षकों का कहना है कि अब प्रबंधक झूठे आरोप लगाकर कार्रवाई कर देते और अनावश्यक दबाव बनाते हैं।

संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सोहनलाल वर्मा ने कहा कि वर्ष 2023 में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक सेवा चयन आयोग ने सेवा सुरक्षा की महत्वपूर्ण धारा को हटा दिया। यह शिक्षकों की लाइफलाइन मानी जाती थी। इस धारा के रहते किसी भी शिक्षक पर बिना ठोस आधार के दंडात्मक कार्रवाई नहीं हो सकती थी लेकिन इसके समाप्त होते ही शिक्षकों का शोषण बढ़ गया है।
उन्होंने बताया कि चयन बोर्ड अधिनियम 1982 के निष्क्रिय होने के कारण सेवा सुरक्षा की धारा 21, पदोन्नति की धारा 12 और कार्यवाहक प्रधानाचार्य की तदर्थ पदोन्नति से जुड़ी धारा 18 भी समाप्त हो गई हैं। इन प्रावधानों को नए उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम 2023 में शामिल नहीं किया गया। इससे शिक्षकों में गहरा असंतोष है।
सोहनलाल वर्मा ने कहा कि लगभग डेढ़ साल से हजारों शिक्षक सेवा सुरक्षा की बहाली के लिए संघर्ष कर रहे हैं लेकिन सरकार इस मुद्दे पर लगातार अनदेखी कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो शिक्षक आंदोलन को और तेज करेंगे। प्रदर्शन में शामिल शिक्षकों ने एक स्वर में कहा कि यह सिर्फ नौकरी का सवाल नहीं बल्कि उनके सामाजिक सम्मान और भविष्य की सुरक्षा का मुद्दा है।






