Lucknow City

KGMU परिसर की मजारों पर प्रशासन सख्त, 5 मजार कमेटियों को दूसरा नोटिस… जानें कब तक देना है जवाब

केजीएमयू प्रशासन की ओर से 22 जनवरी को जारी किया गया था पहला नोटिस, एक ही मजार कमेटी की ओर से अभी तक दिया जवाब

लखनऊ, 9 फरवरी 2026:

यूपी की राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) परिसर में बनी मजारों को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए परिसर में स्थित पांच मजारों को दूसरा नोटिस जारी किया है। पहले नोटिस का संतोषजनक जवाब न मिलने के बाद यह कदम उठाया गया है। सभी मजार कमेटियों को 28 फरवरी तक कुलसचिव के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने और मजारों की वैधता से जुड़े दस्तावेज पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।

केजीएमयू प्रशासन की ओर से 22 जनवरी को परिसर में बनी मजारों को लेकर पहला नोटिस जारी किया गया था। इस नोटिस में मजारों के निर्माण की वैधता, अनुमति से जुड़े कागजात और उनके ऐतिहासिक अस्तित्व से संबंधित दस्तावेज मांगे गए थे। प्रशासन ने इसके लिए 7 फरवरी तक की समय-सीमा तय की थी लेकिन इस अवधि में केवल एक ही मजार कमेटी की ओर से जवाब मिला।

न्यू ऑर्थोपेडिक परिसर में स्थित मजार की कमेटी ने दावा किया कि यह मजार वर्ष 1947 से पहले की है और इसका अस्तित्व आजादी से पहले से चला आ रहा है। प्रशासन ने इस दावे की जांच शुरू कर दी है और संबंधित अभिलेखों की सत्यता परखने की बात कही है। वहीं, शेष पांच मजार कमेटियों की ओर से पहले नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया गया।

इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए प्रशासन ने अब इन सभी मजारों को दूसरा नोटिस जारी किया है। दूसरा नोटिस जिन मजारों को दिया गया उनमें क्वीन मैरी हॉस्पिटल परिसर, माइक्रोबायोलॉजी विभाग, न्यू बॉयज हॉस्टल परिसर, रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग और शताब्दी फेज-2 अस्पताल परिसर में स्थित मजारें शामिल हैं।

केजीएमयू प्रशासन का कहना है कि तय समय पर जवाब न देना नियमों की अनदेखी मानी जाएगी। 28 फरवरी को सभी संबंधित मजार कमेटियों को कुलसचिव के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष और जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। प्रशासन ने साफ किया है कि प्राप्त जवाब और दस्तावेजों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इस कार्रवाई से परिसर में अतिक्रमण और अवैध निर्माण को लेकर प्रशासन की सख्ती का संकेत मिल रहा है, वहीं यह मामला अब शहर में चर्चा का विषय बन गया है।

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