Uttar Pradesh

ग्रीन टेक्नोलॉजी से बना ‘फ्यूचर एयरपोर्ट’ : नोएडा का टर्मिनल-1 बनेगा नया ग्लोबल स्टैंडर्ड

एलसी-3 तकनीक से किया गया निर्माण, स्मार्ट फैसिलिटीज और हाई-कैपेसिटी ऑपरेशन के साथ तैयार, हर घंटे 30 फ्लाइट्स, 2.5 लाख टन कार्गो क्षमता से बनेगा देश का आधुनिक लॉजिस्टिक्स हब

नोएडा, 28 मार्च 2026:

देश के एविएशन सेक्टर में एक नई क्रांति की शुरुआत करते हुए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अपने अत्याधुनिक और पर्यावरण अनुकूल इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण देश के सबसे आधुनिक एयरपोर्ट्स में शामिल होने जा रहा है। खासतौर पर इसका टर्मिनल-1 आकार, क्षमता और तकनीकी नवाचार के लिहाज से एक नया मानक स्थापित करेगा।

करीब 1.37 लाख वर्ग मीटर में फैले इस टर्मिनल का निर्माण देश में पहली बार बड़े पैमाने पर एलसी-3 (चूना-मिट्टी-सीमेंट मिश्रण) तकनीक से किया गया है। यह लो-कार्बन निर्माण सामग्री पारंपरिक सीमेंट के मुकाबले पर्यावरण पर कम प्रभाव डालती है। इससे यह एयरपोर्ट ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभर रहा है।

यात्रियों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए यहां 48 चेक-इन काउंटर, 20 सेल्फ बैगेज ड्रॉप और 9 आधुनिक सिक्योरिटी चेक लेन विकसित की जा रही हैं। इससे यात्रियों को तेज, सहज और डिजिटल अनुभव मिलेगा। अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए 9-9 इमिग्रेशन काउंटर के साथ फास्ट-ट्रैक सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे समय की बचत और सुगम आवागमन सुनिश्चित होगा।

घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन को व्यवस्थित रखने के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं की गई हैं। घरेलू उड़ानों के लिए 10 एयरोब्रिज और 2 बस बोर्डिंग गेट, जबकि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए 2 एयरोब्रिज और एक बस बोर्डिंग गेट की सुविधा होगी।

एयरपोर्ट की क्षमता भी इसे खास बनाती है। यह प्रति घंटे लगभग 30 विमानों के टेकऑफ और लैंडिंग को संभाल सकेगा। वहीं, सालाना 2.5 लाख मीट्रिक टन कार्गो हैंडलिंग क्षमता के साथ यह एयरपोर्ट एक मजबूत लॉजिस्टिक्स हब के रूप में उभरेगा। इससे व्यापार और निर्यात को भी नई रफ्तार मिलेगी। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट यात्रियों को विश्वस्तरीय अनुभव देने के साथ पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक तकनीक के संतुलन का भी बेहतरीन उदाहरण साबित होगा।

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