लखनऊ, 5 अप्रैल 2026:
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को भारतेंदु नाट्य अकादमी में स्वर्ण जयंती नाट्य समारोह की शुरुआत की। सीएम ने रंगमंच को समाज का आईना बताते हुए कहा कि अभिनय के जरिए जनचेतना पैदा होती है और यही समाज को नई दिशा देता है। उन्होंने कलाकारों से कहा कि संवाद, संगीत, स्क्रिप्ट और भाषा ऐसी होनी चाहिए जो सीधे लोगों के दिल तक पहुंचे।
उन्होंने पद्म पुरस्कार विजेता कलाकार अनिल रस्तोगी को बधाई देते हुए संस्कृति विभाग से कहा कि नई और पुरानी पीढ़ी को साथ जोड़कर काम किया जाए। अकादमी की जरूरतों पर भी सरकार की ओर से सहयोग का भरोसा देते हुए छात्रावास निर्माण का निर्देश दिया।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में महाराज सुहेलदेव और सालार मसूद का जिक्र करते हुए लंबा संदर्भ रखा। उन्होंने कहा कि एक हजार साल पहले सुहेलदेव ने सालार मसूद को पराजित किया था। उनके मुताबिक जिस तरह से यह युद्ध हुआ, उसके बाद करीब डेढ़ सौ साल तक कोई विदेशी आक्रांता भारत पर हमला करने की हिम्मत नहीं कर सका।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इतिहास में लंबे समय तक सुहेलदेव को नजरअंदाज किया गया, जबकि जिन लोगों ने देश को नुकसान पहुंचाया, उनके नाम पर आयोजन होते रहे। उन्होंने कहा कि बहराइच में उस स्थान पर, जहां सुहेलदेव ने सालार मसूद को हराया, वहां पहले सालार मसूद का मेला लगता था और बड़ी संख्या में लोग वहां जाते थे।

उन्होंने अपने गोरखपुर सांसद रहने के समय का जिक्र करते हुए कहा कि जब वह सुहेलदेव के विजयोत्सव में शामिल होने बहराइच पहुंचे थे तो उन्हें रोकने की कोशिश की गई, लेकिन वह कार्यक्रम में गए। उन्होंने कहा कि अब हालात बदल चुके हैं, पहले जहां लोग सालार मसूद के मेले में जाते थे, अब वही भीड़ सुहेलदेव के स्मारक पर पहुंचती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सालार मसूद ने देश की आस्था और सांस्कृतिक स्थलों को नुकसान पहुंचाया था। उनके मुताबिक ऐसे लोगों को महिमामंडित करने की परंपरा गलत है। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक अत्याचार करने वालों के खिलाफ सख्त रवैया नहीं अपनाया जाएगा, तब तक वे हमारी संस्कृति पर हमला करते रहेंगे।
उन्होंने अफसोस जताया कि सुहेलदेव जैसे नायकों पर बहुत कम नाटक, गीत या सांस्कृतिक प्रस्तुतियां तैयार की गई हैं। कलाकारों से अपील करते हुए कहा कि इन विषयों पर गंभीरता से काम होना चाहिए। रंगमंच वह जगह है जहां भावनाएं शब्द बनती हैं और शब्द अभिनय में बदलकर लोगों को प्रभावित करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज को जोड़ने का काम करते हैं और कलाकारों की जिम्मेदारी है कि वे सकारात्मक दिशा दें।

उन्होंने आनंदमठ पर आधारित प्रस्तुति की तारीफ की और कहा कि वंदे मातरम देशभक्ति का प्रतीक है। ब्रिटिश शासन के दौरान बंगाल अकाल और स्पेनिश फ्लू का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय सरकार संवेदनशील नहीं थी। वहीं कोरोना काल में सरकार ने लोगों के साथ खड़े होकर हालात संभाले। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एक समय ऐसा भी रहा जब संस्थानों में गलत छवि वाले लोगों को नायक बनाकर पेश किया गया। पेशेवर गुंडों को नायक के रूप में प्रस्तुत करने का असर समाज पर पड़ा और वैसी ही सोच विकसित होने लगी।
सीएम ने रानी लक्ष्मीबाई, महाराज महेंद्र प्रताप, चंद्रशेखर आजाद, रामप्रसाद बिस्मिल जैसे नायकों का जिक्र करते हुए कहा कि इन पर लघु नाटक तैयार किए जाएं ताकि नई पीढ़ी उनसे जुड़ सके। मुख्यमंत्री ने भारतेंदु हरिश्चंद्र को आधुनिक हिंदी का प्रमुख स्तंभ बताते हुए कहा कि उनकी रचनाएं आज भी प्रासंगिक हैं। अंधेर नगरी और भारत दुर्दशा जैसे नाटकों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि साहित्य ने हमेशा समाज को सच दिखाने का काम किया है।
कार्यक्रम में पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह, महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायक योगेश शुक्ल, भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह, भारतेंदु नाट्य अकादमी के अध्यक्ष रतिशंकर त्रिपाठी सहित कई जनप्रतिनिधि, रंगकर्मी और पूर्व छात्र मौजूद रहे।






