लखनऊ, 2 मार्च 2026:
प्रदेश में राजस्व विवादों के जल्दी निस्तारण को लेकर चल रही सख्त मॉनिटरिंग का असर अब साफ दिखने लगा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हर महीने जिलावार समीक्षा कर रहे हैं, जिसके चलते प्रशासन ने मामलों को तेजी से निपटाने की रणनीति अपनाई है। इसका नतीजा यह रहा कि पिछले कुछ सालों में राजस्व वादों के निस्तारण की रफ्तार लगातार बढ़ी है।
राजस्व न्यायालय कंप्यूटरीकृत प्रबंधन प्रणाली (आरसीसीएमएस) की फरवरी रिपोर्ट के मुताबिक पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा मामले राजधानी लखनऊ में निपटाए गए, जबकि जनपद स्तरीय न्यायालयों में जौनपुर ने फिर बाजी मार ली। खास बात यह है कि जौनपुर पिछले 15 महीनों से टॉप फाइव जिलों में बना हुआ है।
राजधानी में 15,981 मामलों का निस्तारण
सरकार की प्राथमिकता है कि जमीन और राजस्व से जुड़े विवाद लंबित न रहें और लोगों को जल्द राहत मिले। इसी दिशा में जिलाधिकारी और राजस्व अधिकारी अभियान चलाकर पुराने मामलों को खत्म कर रहे हैं। आरसीसीएमएस रिपोर्ट के अनुसार फरवरी में प्रदेश भर में कुल 3,34,538 मामलों का निस्तारण किया गया।
लखनऊ के जिलाधिकारी विशाख जी. अय्यर के अनुसार फरवरी में राजधानी में सबसे ज्यादा 15,981 मामले निपटाए गए। इसके बाद प्रयागराज 14,132 मामलों के साथ दूसरे और आजमगढ़ 9,333 मामलों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। आजमगढ़ प्रशासन का कहना है कि नियमित समीक्षा बैठकों और विशेष अभियान से लंबित मामलों में तेजी आई है। इसी क्रम में जौनपुर ने 8,912 मामलों का निस्तारण कर चौथा और बाराबंकी ने 8,378 मामलों के साथ पांचवां स्थान हासिल किया।
जनपद स्तरीय न्यायालयों में जौनपुर सबसे आगे
बोर्ड ऑफ रेवेन्यू उत्तर प्रदेश की रिपोर्ट के मुताबिक जौनपुर की पांच राजस्व अदालतों ने तय मानक से कहीं ज्यादा मामलों का निस्तारण किया। जहां प्रति माह 250 मामलों का लक्ष्य था, वहीं 542 मामलों को निपटाकर 216.80 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की गई। इसी के साथ जनपद स्तरीय न्यायालयों में जौनपुर प्रदेश में पहले स्थान पर रहा। मानक 300 मामलों के मुकाबले 381 मामलों का निस्तारण कर बस्ती दूसरे और 353 मामलों के साथ प्रतापगढ़ तीसरे स्थान पर रहा।
जिलाधिकारी न्यायालयों की बात करें तो जौनपुर में तय 30 मामलों के लक्ष्य के मुकाबले 86 मामलों का निस्तारण किया गया, जो 286.67 प्रतिशत उपलब्धि है और यह प्रदेश में सबसे ज्यादा रही। इसके बाद भदोही दूसरे और बिजनौर तीसरे स्थान पर रहे। सरकार का कहना है कि राजस्व मामलों के जल्द निपटारे से लोगों को राहत मिल रही है और प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही भी बढ़ी है। आने वाले महीनों में भी इसी तरह अभियान चलाकर लंबित मामलों को कम करने पर जोर रहेगा।






