लखनऊ, 9 मार्च 2026:
प्रदेश में उच्च शिक्षा व्यवस्था को सुलभ, सस्ती और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने राज्य विश्वविद्यालयों को साफ हिदायत दी है कि परीक्षा शुल्क केवल शासनादेश में तय दरों के मुताबिक ही लिया जाए। यदि कोई विश्वविद्यालय तय सीमा से ज्यादा फीस वसूलता है तो उसकी ऑडिट कराई जाएगी और जरूरी कार्रवाई भी होगी।
सोमवार को विधानसभा स्थित कार्यालय में हुई समीक्षा बैठक में लखनऊ विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध कॉलेजों द्वारा तय नियमों के विपरीत फीस लिए जाने के मामले पर चर्चा हुई। बैठक में विश्वविद्यालयों की फीस संरचना, परीक्षा शुल्क और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से बातचीत की गई।
छात्रहित को प्राथमिकता देने के निर्देश
उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि फीस में अनावश्यक बढ़ोतरी से आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। इसलिए सभी विश्वविद्यालयों को छात्रहित को ध्यान में रखते हुए ही फैसले लेने चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश है कि शिक्षा हर छात्र के लिए सुलभ और किफायती रहे।

शासनादेश के अनुसार तय है परीक्षा शुल्क
सरकार की ओर से जारी आदेश के मुताबिक राज्य विश्वविद्यालयों में परीक्षा शुल्क की एक समान व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत बीए, बीएससी, बीकॉम, बीबीए, बीसीए, बीएड, बीपीएड, बीजेएमसी, बीएफए और बीवोक जैसे पाठ्यक्रमों के लिए प्रति सेमेस्टर 800 रुपये परीक्षा शुल्क तय किया गया है। इसी तरह एलएलबी, बीएससी एग्रीकल्चर ऑनर्स, बीटेक और बायोटेक जैसे पाठ्यक्रमों के लिए 1000 रुपये प्रति सेमेस्टर निर्धारित हैं, जबकि बीडीएस, नर्सिंग, बीएएमएस और बीयूएमएस जैसे पाठ्यक्रमों के लिए 1500 रुपये प्रति सेमेस्टर परीक्षा शुल्क तय किया गया है।
वित्तीय अनुशासन बनाए रखने पर जोर
मंत्री ने विश्वविद्यालयों को यह भी निर्देश दिया कि वे शासनादेशों का पूरी तरह पालन करें और वित्तीय अनुशासन बनाए रखें। साथ ही संस्थानों को अपने संसाधन मजबूत करने, नए कोर्स शुरू करने और बेहतर वित्तीय प्रबंधन पर भी ध्यान देने को कहा गया, ताकि विश्वविद्यालय धीरे-धीरे आत्मनिर्भर बन सकें। बैठक में विश्वविद्यालयों की वित्तीय स्थिति, परीक्षा संचालन से जुड़ी चुनौतियों और उनके समाधान पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों और विश्वविद्यालय प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव भी रखे। बैठक में एमएलसी उमेश द्विवेदी, अवनीश कुमार सिंह, प्रमुख सचिव एम. पी. अग्रवाल, सचिव अमृत त्रिपाठी, लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जय प्रकाश सैनी और अन्य अफसर मौजूद रहे।






