न्यूज डेस्क, 26 मार्च 2026:
इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच कई हफ्तों से जारी तनाव और युद्ध के चलते वैश्विक पेट्रोलियम बाजार में उथल-पुथल के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान ने भारत समेत अपने ‘मित्र देशों’ को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति दे दी है। इससे तेल आपूर्ति पर मंडरा रहा बड़ा खतरा फिलहाल टलता नजर आ रहा है।
मुंबई स्थित ईरानी कॉन्सुलेट के हवाले से आई जानकारी के मुताबिक ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह बंद नहीं किया गया है। यह मार्ग केवल उन देशों के लिए प्रतिबंधित है जो ईरान के खिलाफ हैं। भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान जैसे देशों को कुछ शर्तों के साथ आवागमन की छूट दी गई है।
भारत के लिए यह फैसला बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि देश अपनी कुल तेल जरूरत का करीब 85 प्रतिशत आयात करता है। इसमें से लगभग 55-60 प्रतिशत तेल खाड़ी देशों से होर्मुज स्ट्रेट के जरिए आता है। ऐसे में इस समुद्री मार्ग के खुले रहने से सप्लाई चेन बाधित नहीं होगी और घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनी रहेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार इस फैसले से तेल की कीमतों पर भी नियंत्रण रहने की संभावना है। युद्ध के चलते कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुके हैं। गुरुवार को यह करीब 2 प्रतिशत बढ़कर 104 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। हालांकि यदि सप्लाई सामान्य रहती है तो कीमतों में स्थिरता आ सकती है।
युद्ध के दौरान जहाजों के इंश्योरेंस प्रीमियम में 2-3 गुना तक बढ़ोतरी हो गई। इससे ट्रांसपोर्ट लागत भी बढ़ गई। अब हालात कुछ सामान्य होने पर यह लागत घटने की उम्मीद है। इसके साथ ही मिडिल ईस्ट से भारत आने वाले तेल टैंकर 5 से 10 दिनों में अपनी मंजिल तक पहुंच सकेंगे।
हालांकि ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर की संभावनाओं से इनकार की खबरों के बाद बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक तेल की कीमतों में 40 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हो चुकी है। इसकी बड़ी वजह होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही में आई कमी है। ऐसे में पूरी दुनिया की नजर इस बात टिकी है कि आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे।






