सीतापुर, 7 जनवरी 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ से सटे सीतापुर जिले के सिधौली तहसील क्षेत्र में सामने आई गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। डीएम के निर्देश पर एसडीएम ने दो लेखपालों को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई कसमंडा और मधवापुर परगना पीरनगर से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में की गई। इससे तहसील प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
पहला मामला कसमंडा ग्राम सभा से जुड़ा है। इस क्षेत्र की तत्कालीन लेखपाल एरम खातून पर फर्जी निवास प्रमाण पत्र जारी करने का आरोप सिद्ध हुआ है। बताया गया कि कसमंडा की ग्राम प्रधान प्रियंका देवी ने सम्पूर्ण समाधान दिवस के दौरान शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि ग्राम सभा में राधा पत्नी श्रीकृष्ण नाम की कोई महिला निवास नहीं करती है। इसके बावजूद फर्जी निवास प्रमाण पत्र जारी कर उसका नाम मतदाता सूची में दर्ज करा दिया गया।
शिकायत के बाद तहसीलदार मुकेश शर्मा द्वारा कराई गई जांच में फर्जी निवास प्रमाण पत्र जारी होने की पुष्टि हुई। जांच रिपोर्ट के आधार पर उपजिलाधिकारी (एसडीएम) राखी वर्मा ने वर्तमान में हिंडौरा में तैनात वहां की तत्कालीन लेखपाल एरम खातून को निलंबित कर दिया। इसके साथ ही उन्हें रजिस्ट्रार कानूनगो कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है।
दूसरा मामला मधवापुर परगना पीरनगर का है। यहां चकमार्ग को अतिक्रमणमुक्त कराए जाने के दौरान यह तथ्य सामने आया कि चकमार्ग पर बनी दीवार संबंधित गाटा संख्या में शामिल ही नहीं है। जांच में इस गंभीर गड़बड़ी के लिए तत्कालीन लेखपाल शशांक मिश्रा को जिम्मेदार माना गया। वर्तमान में उनकी तैनाती सीतारसोई में थी। प्रशासन ने उन्हें भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
दोनों मामलों में जांच के लिए तहसीलदार को अधिकारी नियुक्त किया गया है। एसडीएम ने स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई से प्रशासन ने साफ संदेश दिया है कि सरकारी कार्यों में लापरवाही, फर्जीवाड़ा और अनियमितता किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।






