Uttar Pradesh

कर्जमाफी से ‘ड्रोन दीदी’ तक : 9 साल में बदला UP का खेती मॉडल, उत्पादन और किसानों की आय में ऐतिहासिक उछाल

योगी सरकार अपनी नीतियों और उपलब्धियों के जरिए कृषि क्षेत्र में किए गए कार्यों को एक मॉडल के रूप में कर रही पेश, कई स्तरों पर हस्तक्षेप कर किसानों की स्थिति सुधारने का दावा

लखनऊ/देवरिया, 22 मार्च 2026:

उत्तर प्रदेश में 9 वर्षों के दौरान कृषि क्षेत्र में हुए बदलावों को लेकर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बड़ा दावा किया है। देवरिया में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि योगी सरकार के कार्यकाल में कृषि क्षेत्र में व्यापक सुधार हुए हैं। यूपी अब एक नए कृषि मॉडल के रूप में देश के सामने उभरा है। उन्होंने कहा कि राज्य की स्थापना के बाद से अब तक की सभी सरकारों में योगी सरकार का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा है। इस सरकार ने किसानों के हितों को लेकर उल्लेखनीय कार्य किए है।

कृषि मंत्री ने जोर देकर कहा कि सरकार की नीतियों ने किसानों की आय में वृद्धि करने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन की दिशा में आगे बढ़ाया है। उनके अनुसार यह बदलाव योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, पारदर्शिता और तकनीकी हस्तक्षेप के कारण संभव हो सका है।

बदली प्रदेश की छवि, खत्म हुआ ‘जंगलराज’

सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय गुंडागर्दी, भ्रष्टाचार, अपहरण, फिरौती और माफियाराज का बोलबाला था। इसका सीधा असर किसानों पर भी पड़ता था। इससे वे भय और असुरक्षा के माहौल में जीवन जीने को मजबूर थे। उन्होंने कहा कि योगी सरकार के आने के बाद इन परिस्थितियों में व्यापक बदलाव आया है। कानून-व्यवस्था में सुधार के साथ ही किसानों को सुरक्षित और बेहतर वातावरण मिला। इससे वे अपनी खेती पर ध्यान केंद्रित कर सके।

किसानों को कर्जमाफी से मिली बड़ी राहत

कृषि मंत्री ने बताया कि सरकार बनने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री योगी ने किसानों को राहत देने के लिए ऐतिहासिक निर्णय लिया। इसके तहत 86 लाख किसानों का 36 हजार करोड़ रुपये का बैंक कर्ज माफ किया गया। यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी तरीके से लागू की गई। उन्होंने कहा कि इस कदम का उद्देश्य केवल आर्थिक राहत देना नहीं था। किसानों को आत्महत्या जैसे कठोर कदम उठाने से रोकना और उन्हें नई शुरुआत का अवसर प्रदान करना भी था। इस निर्णय ने किसानों के बीच भरोसा पैदा किया और सरकार के प्रति उनका विश्वास मजबूत हुआ।

सिंचाई और संसाधनों का बड़ा विस्तार

सरकार ने कृषि के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया। कृषि मंत्री के अनुसार 20-30 वर्षों से उपेक्षित नहरों की मरम्मत कराई गई और अधूरी परियोजनाओं को पूरा किया गया। इससे 30 लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि को सिंचाई की सुविधा मिली। इसके साथ ही प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत 92 हजार से अधिक सोलर पंप लगाए गए जिन पर किसानों को 60 प्रतिशत तक अनुदान दिया गया। इससे किसानों को बिजली पर निर्भरता से मुक्ति मिली और सालभर निर्बाध सिंचाई संभव हो सकी।

बिजली बिल माफी और गन्ना भुगतान

कृषि मंत्री ने बताया कि सरकार ने 16 लाख किसानों के नलकूपों के बिजली बिल माफ किए हैं। करीब 3600 करोड़ रुपये का भार स्वयं वहन कर रही है। इससे किसानों की लागत में कमी आई है। गन्ना किसानों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि पहले भुगतान में वर्षों की देरी होती थी लेकिन अब तक 3 लाख 15 हजार करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य भुगतान किया जा चुका है। इसके साथ ही गन्ना मूल्य को 300 रुपये से बढ़ाकर 400 रुपये प्रति कुंतल किया गया। इससे किसानों की आय में सीधा लाभ हुआ।

डीबीटी और पीएम किसान योजना से पारदर्शिता

सरकार ने किसानों को सीधे लाभ पहुंचाने के लिए डीबीटी प्रणाली को प्रभावी बनाया। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत प्रदेश के 3 करोड़ से अधिक किसानों को पंजीकृत कर 99 हजार 500 करोड़ रुपये सीधे उनके खातों में भेजे गए। कृषि मंत्री ने कहा कि यह राशि इतनी बड़ी है कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में एक साल में जितना गन्ना मूल्य भुगतान होता था उसके बराबर है। इससे किसानों के जीवन में स्थिरता और विश्वास दोनों बढ़े हैं।

फसल बीमा से आपदा में राहत

प्राकृतिक आपदाओं से किसानों को बचाने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को मजबूती से लागू किया गया। पिछले 9 वर्षों में 67 लाख 52 हजार किसानों को 5660 करोड़ 33 लाख रुपये की सहायता दी गई।
वहीं, चालू वर्ष के खरीफ सीजन में 5 लाख 39 हजार किसानों को 532 करोड़ 17 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति दी जा चुकी है। मार्च के अंत तक अतिरिक्त 2.25 लाख किसानों को 170 करोड़ रुपये देने की योजना है।

उत्पादन में हुई रिकॉर्ड वृद्धि, प्रदेश बना नंबर वन

कृषि मंत्री ने बताया कि 2017 में प्रदेश का खाद्यान्न उत्पादन 547 लाख मीट्रिक टन था। यह 2024-25 में बढ़कर 737 लाख मीट्रिक टन हो गया है। उत्तर प्रदेश आज देश में खाद्यान्न उत्पादन में अग्रणी राज्य बन चुका है। इसके अलावा दूध उत्पादन में भी प्रदेश पहले स्थान पर है। आम, गेहूं, धान और गन्ना उत्पादन में भी यूपी देश में नंबर-1 पर पहुंच चुका है। यह वृद्धि सरकार की नीतियों और किसानों की मेहनत का संयुक्त परिणाम है।

तकनीक से खेती को मिला नया आयाम

योगी सरकार ने कृषि को आधुनिक बनाने के लिए तकनीकी हस्तक्षेपों को बढ़ावा दिया है। कृषि यंत्रों के उपयोग में वृद्धि के साथ ही ड्रोन तकनीक को भी अपनाया जा रहा है। ‘ड्रोन दीदी’ जैसी पहल के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को तकनीक से जोड़ते हुए उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। इसके अलावा प्रदेश में 20 नए कृषि विज्ञान केंद्र स्थापित किए गए हैं। कुशीनगर में नया कृषि विश्वविद्यालय बनाया जा रहा है। यह प्रदेश का पांचवां राजकीय कृषि विश्वविद्यालय होगा। केंद्र सरकार द्वारा एक और केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना भी की गई है।

किसानों तक पहुंच रहीं सुविधाएं

कृषि मंत्री ने बताया कि प्रदेश के 824 विकास खंडों में से 480 में किसान कल्याण केंद्र बनाए जा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से किसानों को प्रशिक्षण, उन्नत बीज और दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं। बैतालपुर में स्थापित केंद्र इसका उदाहरण है जहां किसान आधुनिक खेती के गुर सीख रहे हैं।

कृषि बना अर्थव्यवस्था की रीढ़

सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि योगी सरकार ने ‘बीमारू’ कहे जाने वाले उत्तर प्रदेश की छवि को पूरी तरह बदल दिया है। आज प्रदेश खाद्यान्न, चीनी और दूध उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य बन चुका है। उन्होंने कहा कि पिछले 9 वर्षों में कृषि क्षेत्र न केवल सशक्त हुआ है, बल्कि यह राज्य की अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार भी बन गया है।

सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में किसानों की आय को और बढ़ाना और उत्तर प्रदेश को कृषि के क्षेत्र में वैश्विक पहचान दिलाना है। योगी सरकार अपनी नीतियों और उपलब्धियों के जरिए कृषि क्षेत्र में किए गए कार्यों को एक मॉडल के रूप में प्रस्तुत कर रही है। कर्जमाफी से लेकर तकनीकी नवाचार तक, सरकार ने कई स्तरों पर हस्तक्षेप कर किसानों की स्थिति सुधारने का दावा किया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button