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UP बजट 2026 : हेल्थ सेक्टर पर बड़ा निवेश, 14 नए मेडिकल कॉलेज से बदलेगा इलाज का नक्शा

बजट में दिखी इलाज से लेकर डॉक्टर तैयार करने तक की पूरी चेन को मजबूत करने की तैयारी, लखनऊ के कैंसर संस्थान के लिए 315 करोड़ और असाध्य रोगों के मुफ्त इलाज के लिए 130 करोड़ रुपये का प्रावधान

लखनऊ, 11 फरवरी 2026:

यूपी विधानसभा में प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बुधवार को 9.12 लाख करोड़ रुपये का विशाल बजट पेश कर दिया। बीते साल के मुकाबले करीब 13 फीसदी बढ़े इस बजट में सरकार ने 43 हजार करोड़ रुपये की नई योजनाओं का ऐलान किया है। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा और आयुष सेवाओं पर भी बड़ा फोकस रहा। बजट में इलाज से लेकर डॉक्टर तैयार करने तक की पूरी चेन को मजबूत करने की तैयारी दिखी।

बजट में चिकित्सा शिक्षा के लिए 14,997 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रदेश में मौजूदा 81 मेडिकल कॉलेजों (45 सरकारी, 36 निजी) के साथ अब 14 नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना व संचालन के लिए 1,023 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। खास बात यह है कि जिन 16 जनपदों में अब तक मेडिकल कॉलेज नहीं हैं वहां पीपीपी मॉडल पर संस्थान खोले जाएंगे। एमबीबीएस सीटें 2017 की 4,540 से बढ़कर 12,800 और पीजी सीटें 1,221 से बढ़कर 4,995 तक पहुंच चुकी हैं। यूपी अब डॉक्टरों की फैक्ट्री बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

लखनऊ के कैंसर संस्थान के लिए 315 करोड़ रुपये और असाध्य रोगों के मुफ्त इलाज के लिए 130 करोड़ रुपये का प्रावधान राहत की बड़ी खबर है। चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के लिए 37,956 करोड़ रुपये रखे गए हैं। यह पिछले साल से 15 फीसदी अधिक है। जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम से गर्भवती महिलाओं को कैशलेस डिलीवरी की गारंटी मिल रही है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत ब्लॉक स्तर पर मेडिकल टीमें स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की जांच कर रही हैं।

पल्स पोलियो अभियान में 3.28 करोड़ से ज्यादा बच्चों को ड्रॉप पिलाई गई, जेई से प्रभावित 42 जिलों में टीकाकरण जारी है। आयुष्मान भारत-मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना से 49.22 लाख परिवारों को लाभ मिल रहा है, जिसके लिए 500 करोड़ रुपये रखे गए हैं। मानसिक स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता देते हुए सभी 75 जिलों में जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम चल रहा है।

रोगों की निगरानी के लिए डिजीज सर्विलांस पोर्टल पर सरकारी-निजी दोनों क्षेत्रों से नियमित रिपोर्टिंग हो रही है।
आयुष सेवाओं के लिए 2,867 करोड़ रुपये का बजट तय हुआ है। प्रदेश भर में आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथिक चिकित्सालयों के नेटवर्क को मजबूत किया जा रहा है।

लखनऊ और पीलीभीत की औषधि निर्माणशालाओं की उत्पादन क्षमता बढ़ाने की तैयारी है, ताकि प्रमाणित दवाइयां समय पर मिल सकें। यह बजट यूपी के हेल्थ सेक्टर को नई रफ्तार देने वाला साबित हो सकता है। प्रदेश में इलाज सुलभ होगा, डॉक्टरों की कमी घटेगी और पारंपरिक चिकित्सा को भी मजबूती मिलेगी।

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