लखनऊ, 18 जनवरी 2026:
राजधानी लखनऊ में रविवार को यूपी हेल्थ टेक कॉन्क्लेव 1.0 का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अगर सरकार, स्वास्थ्य विभाग और तकनीकी क्षेत्र मिलकर काम करें, तो प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं और बेहतर हो सकती हैं। तकनीक के इस्तेमाल से मरीजों की स्क्रीनिंग और इलाज की व्यवस्था ज्यादा मजबूत होगी।
इस मौके पर मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने क्लीनिकल ट्रायल और फार्मास्युटिकल सेक्टर से जुड़े सॉफ्टवेयर का लोकार्पण किया। साथ ही स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी एक महत्वपूर्ण पुस्तक का भी विमोचन हुआ।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि बीते आठ-नौ वर्षों में केंद्र सरकार के सहयोग से उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सिर्फ 25 करोड़ की आबादी वाला राज्य नहीं है, बल्कि यहां की स्वास्थ्य सेवाओं का फायदा करीब 35 करोड़ से ज्यादा लोग उठाते हैं।
सीएम ने कहा कि पहले हालात काफी मुश्किल थे। लोगों के पास इलाज के लिए पैसे नहीं होते थे और अस्पतालों में सुविधाएं भी सीमित थीं। बीमार बच्चों को लेकर लोग आते थे, लेकिन कई बार इलाज के बिना ही घर लौट जाते थे। अब सरकार आयुष्मान भारत योजना के तहत पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज दे रही है। अलग-अलग वर्गों को इसका फायदा मिल रहा है।

उन्होंने बताया कि अब तक 5.50 करोड़ गोल्डन कार्ड जारी किए जा चुके हैं। पीएचसी से लेकर जिला अस्पताल तक मुफ्त इलाज की सुविधा दी जा रही है। इसका असर यह हुआ है कि मातृ मृत्यु दर में सुधार हुआ है और उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय मानकों के करीब पहुंच गया है।
सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश को मलेरिया, चिकनगुनिया, कालाजार और इंसेफेलाइटिस जैसी बीमारियों से काफी हद तक निजात मिली है। पहले हर साल करीब 40 हजार बच्चों की मौत इंसेफेलाइटिस से होती थी, लेकिन 2017 के बाद चले अभियान से यह बीमारी लगभग खत्म हो गई। कई जिलों में टीबी पर भी काबू पाया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब समय आ गया है कि टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल कर स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत किया जाए। मेडिकल डिवाइस पार्क और फार्मा पार्क पर काम चल रहा है, जिन्हें जल्द पूरा करना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि बिना सही जांच के मरीजों को रेफर करने की आदत पर रोक लगनी चाहिए और डॉक्टरों व कर्मचारियों को नए सिरे से प्रशिक्षण दिया जाए।

सीएम ने बताया कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में सरकारी और निजी मिलाकर सिर्फ 40 मेडिकल कॉलेज थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 81 हो गई है। प्रदेश में दो एम्स भी काम कर रहे हैं। सीएचसी, पीएचसी और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की मजबूत व्यवस्था तैयार की गई है।
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि यह कॉन्क्लेव बेहद अहम है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, सही डायग्नोसिस से करीब 60 फीसदी इलाज बेहतर हो सकता है। टेक्नोलॉजी की मदद से जांच को और सटीक बनाया जा सकता है। डिजिटल हेल्थ मिशन से इलाज का खर्च भी कम होगा। सरकार फार्मा सेक्टर को पूरा सहयोग दे रही है। मेडिकल और दवाओं के क्षेत्र में होने वाले नए शोध को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि इलाज सस्ता हो और लोगों को बेहतर सुविधा मिल सके।
कार्यक्रम में सलाहकार अवनीश अवस्थी, विप्रो समेत कई बड़ी कंपनियों के अधिकारी और उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।






