Uttar Pradesh

UP में बदली सेहत की तस्वीर : 9 साल में मेडिकल कॉलेज 36 से 81 हुए, MBBS सीटें बढ़कर 12,700

हर जिले में आधुनिक अस्पताल, 1,500 से अधिक हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर सक्रिय, पीजी सीटों में ऐतिहासिक वृद्धि, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता में हुआ सुधार, 200 से अधिक नई पैथोलॉजी और डायग्नोस्टिक यूनिट स्थापित

लखनऊ, 18 फरवरी 2026:

यूपी की स्वास्थ्य व्यवस्था नौ वर्षों में विस्तार के साथ संरचनात्मक बदलाव के दौर से गुजरी है। सरकार ने अस्पतालों के निर्माण और आधुनिकीकरण से आगे बढ़कर मेडिकल शिक्षा, ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं और डिजिटल हेल्थ के मजबूत इकोसिस्टम पर फोकस किया है। नतीजा यह है कि प्रदेश में इलाज और डॉक्टरों की उपलब्धता दोनों मोर्चों पर तस्वीर तेजी से बदली है।

2017 तक जहां प्रदेश में 36 सरकारी मेडिकल कॉलेज थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 81 हो चुकी है। ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन मेडिकल कॉलेज’ के विजन के तहत नए कॉलेज खोले गए हैं। एमबीबीएस सीटें लगभग 4,690 से बढ़कर 12,700 हो गई हैं। पीजी सीटों में भी दोगुने से अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे आने वाले वर्षों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता में ठोस सुधार की उम्मीद है।

प्रदेश के 75 जिलों में जिला अस्पतालों का आधुनिकीकरण किया गया है। आईसीयू, एनआईसीयू, डायलिसिस यूनिट, ट्रॉमा सेंटर और आधुनिक पैथोलॉजी लैब जैसी सुविधाएं अब अधिक जिलों में उपलब्ध हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) को हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के रूप में विकसित किया जा रहा है। 1,500 से अधिक हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर क्रियाशील हैं जहां मातृ-शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, जांच और गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग जैसी सेवाएं मिल रही हैं।

UP Healthcare Transformation Medical Colleges and Growth (1)

डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड और टेलीमेडिसिन के जरिए ग्रामीण इलाकों को विशेषज्ञ डॉक्टरों से जोड़ा गया है। ‘आरोग्य मंदिर’ की अवधारणा के तहत आयुष, योग, प्राकृतिक चिकित्सा और एलोपैथिक सेवाओं का समन्वय बढ़ाया गया है। कई जिलों में आयुष अस्पताल और वेलनेस सेंटर बने हैं, वहीं आयुष विश्वविद्यालय की दिशा में कदम उठाए गए हैं, ताकि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को संस्थागत मजबूती मिल सके।

कोविड-19 के दौरान विकसित हुई लैब क्षमता को स्थायी रूप से मजबूत किया गया है। अब सभी जिलों में आरटी-पीसीआर लैब, ब्लड बैंक और डिजिटल एक्स-रे जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। पिछले नौ वर्षों में 200 से अधिक नई पैथोलॉजी और डायग्नोस्टिक यूनिट शुरू हुई हैं, जिससे जांच की पहुंच और गुणवत्ता दोनों बेहतर हुई हैं। 108 और 102 एम्बुलेंस सेवाओं के बेड़े का विस्तार कर 4,000 से अधिक एम्बुलेंस संचालित की जा रही हैं, जिनमें एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस भी शामिल हैं।

वित्तीय वर्ष 2026-27 में स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के लिए 55,000 करोड़ रुपये से अधिक का बजट प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वास्थ्य क्षेत्र को ‘सेवा और सुशासन’ का आधार बताते हुए निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों की नियमित समीक्षा की है। पूर्व आईएएस अफसर अनुराग पटेल के मुताबिक ये बदलाव सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं हैं, बल्कि गुणवत्ता और पहुंच दोनों स्तरों पर असर दिखा रहे हैं।

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