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यूपी : कृषि को नई दिशा देने की पहल… लखनऊ में उत्तर जोन सम्मेलन में बना साझा रोडमैप

सीएम योगी व केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया शुभारंभ, किसानों तक सीधे पहुंचेगी तकनीक, फार्मर आईडी और रीजनल प्लानिंग पर जोर, कई राज्यों के मंत्री, वैज्ञानिक और प्रगतिशील किसान शामिल, खेती से जुड़े हर पहलू पर मंथन

लखनऊ, 24 अप्रैल 2026:

राजधानी के सुशांत गोल्फ सिटी क्षेत्र में शुक्रवार को उत्तर जोन क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन की शुरुआत हुई। सम्मेलन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिरकत कर खेती और किसानों को नई दिशा देने के लिए केंद्र और राज्यों के तालमेल पर जोर दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और शिवराज सिंह चौहान ने दीप प्रज्ज्वलन कर की। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि खरीफ और रबी सीजन की योजनाओं को जमीन पर ज्यादा असरदार बनाने के लिए रीजनल कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया जा रहा है। सभी राज्यों के साथ मिलकर कृषि का राज्यवार रोडमैप तैयार किया जाएगा।

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उन्होंने फार्मर आईडी को किसानों की पहचान बताते हुए कहा कि यह कई समस्याओं का हल बन सकती है। इसमें 17 तरह की सुविधाएं जुड़ी हैं, जिससे किसानों को योजनाओं का सीधा लाभ मिल सकेगा। शिवराज सिंह चौहान ने विकसित कृषि संकल्प अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि लैब को लैंड से जोड़ने की दिशा में यह बड़ा कदम रहा। इस अभियान के तहत 60 हजार से ज्यादा गांवों तक पहुंचकर नई तकनीक और अनुसंधान सीधे किसानों तक पहुंचाए गए। अब जरूरत है कि हर राज्य अपनी भौगोलिक स्थिति के हिसाब से इस अभियान को आगे बढ़ाए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर भारत के इस सम्मेलन में अलग-अलग राज्यों के अनुभव साझा हो रहे हैं, जिससे एक-दूसरे की सफल योजनाओं से सीखने का मौका मिलेगा। इस संगोष्ठी से निकलने वाले सुझाव किसानों के जीवन में बदलाव लाने में मदद करेंगे।

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उन्होंने बताया कि विकसित कृषि संकल्प अभियान के दौरान प्रदेश के विभिन्न जिलों में किसानों, वैज्ञानिकों और कृषि शिक्षा से जुड़े युवाओं में खास उत्साह देखने को मिला। पहली बार प्रयोगशालाओं में तैयार तकनीक को सीधे खेतों तक पहुंचाने की कोशिश सफल रही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब कृषि शोध केवल कागजों या लैब तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे खेतों में उतारा जा रहा है। अलग-अलग क्षेत्रों की समस्याओं को ध्यान में रखकर समाधान तैयार किए जा रहे हैं, जिससे किसानों का भरोसा बढ़ा है।

उन्होंने कहा कि पहले योजनाएं कागजों में अटक जाती थीं, लेकिन अब उन्हें जमीन पर लागू करने पर फोकस है। वर्ष 2017 में कृषि विज्ञान केंद्र बंद होने की कगार पर थे, लेकिन अब सभी केंद्र सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। कृषि विकास दर में सुधार हुआ है और उत्पादन में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

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योगी आदित्यनाथ ने तकनीक को खेती का अहम आधार बताते हुए कहा कि समय पर बीज और संसाधन मिलने से उत्पादन में बड़ा इजाफा हो सकता है। कुछ इलाकों में 100 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन के उदाहरण सामने आए हैं। साथ ही प्राकृतिक और जैविक खेती को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

उन्होंने बाराबंकी के किसान राम शरण वर्मा का उदाहरण देते हुए कहा कि वैज्ञानिक तरीकों से खेती कर बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। कई जिलों में किसान एक साल में तीन से चार फसलें ले रहे हैं, जिससे उनकी आमदनी बढ़ी है। प्रदेश में किसानों को 10 से 12 घंटे बिजली मिल रही है और जागरूकता बढ़ने से खेती के तौर-तरीकों में बदलाव आया है। मक्का, गेहूं और आलू के उत्पादन में रिकॉर्ड स्तर हासिल हुआ है। सब्जी और फल उत्पादन में भी तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

सम्मेलन में केंद्रीय राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी और रामनाथ ठाकुर के साथ उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के कृषि मंत्री, अधिकारी, वैज्ञानिक, किसान उत्पादक संगठन और प्रगतिशील किसान शामिल हुए। अलग-अलग सत्रों में किसान क्रेडिट कार्ड, एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड, दलहन-तिलहन मिशन, बागवानी, डिजिटल कृषि जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा जारी रही। खेती, तकनीक, बाजार और कृषि ढांचे से जुड़े मुद्दों पर ठोस कार्ययोजना बनाने के उद्देश्य से हुए इस आयोजन में किसान उत्साहित दिखे।

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