
लखनऊ/ग्रेटर नोएडा, 27 सितंबर 2026:
जिस हुनर को कभी घर की चारदीवारी तक सीमित समझा जाता था, वही अब कारोबार की पहचान बन रहा है। कोई कपड़ों पर रंग भरकर उन्हें हजारों रुपये के फैशन उत्पाद में बदल रही है तो कोई पीतल की कलाकृतियों के जरिए विदेशी बाजार तक पहुंच बना रही है। कोई स्वयं सहायता समूह के जरिए खुद आत्मनिर्भर बन रही है तो साथ की दूसरी महिलाओं के लिए भी कमाई का रास्ता खोल रही है। ग्रेटर नोएडा में चल रहे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में पहुंचीं प्रदेश की महिला उद्यमियों की कहानियां इसी बदलती तस्वीर को सामने ला रही हैं।
मेरठ के कंकरखेड़ा की हरप्रीत कौर अपनी फर्म सॉल फॉर अर्थ के जरिए पीतल से बनी कलाकृतियां और ट्रॉफियां लेकर ट्रेड शो में पहुंची हैं। उनका कहना है कि बड़े मंच पर अपने उत्पाद प्रदर्शित करने का अवसर मिलने से कारोबार को नई पहचान मिली है। उनके उत्पाद अब दूसरे देशों के बाजारों तक भी पहुंच रहे हैं। हरप्रीत के मुताबिक प्रदेश में मिले अवसरों और नीतिगत सहयोग ने उनके कारोबार के विस्तार में मदद की है।

शौक से शुरू हुआ काम, अब सात महिलाओं को रोजगार
गाजियाबाद के बजरिया की अंजली की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। चित्रकारी के शौक को उन्होंने कारोबार में बदला और अंजली क्रिएशन की शुरुआत की। जिला ग्रामोद्योग विकास से ऋण लेकर उन्होंने सादे कपड़ों पर चित्रकारी शुरू की। आज उनके हाथों से तैयार सूट, दुपट्टे, जींस और ट्राउजर 10 हजार रुपये तक की कीमत में बिक रहे हैं। कारोबार बढ़ा तो इसका फायदा सिर्फ अंजली तक नहीं रुका। वह अब सात अन्य महिलाओं को नियमित रोजगार दे रही हैं।
गाजियाबाद के वसुंधरा की प्रतिभा त्यागी प्रतिभा डिजाइनर हब के जरिए हैंडमेड सूट, दुपट्टे, लहंगे और जूट के बैग लेकर ट्रेड शो में आई हैं। उनका फोकस हस्तनिर्मित उत्पादों को बाजार से जोड़ने पर है। ट्रेड शो उनके लिए नए ग्राहकों और कारोबार के नए अवसर तलाशने का मंच बन रहा है।

स्वयं सहायता समूह बना आत्मनिर्भरता का जरिया
बुलंदशहर के नंगला गोविंदपुर की सितारा बेडशीट लेकर ट्रेड शो में पहुंची हैं। वह आजीविका स्वयं सहायता समूह चलाती हैं, जिसमें 13 महिलाएं जुड़ी हैं। उनके मुताबिक समूह की महिलाएं सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर अपने काम को आगे बढ़ा रही हैं। समूह उनके लिए सिर्फ उत्पाद बनाने की जगह नहीं, बल्कि नियमित आय और आर्थिक आत्मनिर्भरता का माध्यम बन रहा है।
सहारनपुर के नांगल क्षेत्र की सुधा सैनी भी हस्तशिल्प उत्पादों के साथ ट्रेड शो में पहुंची हैं। वह चलोरी स्वयं सहायता समूह चलाती हैं। लगातार चौथी बार नोएडा के ट्रेड शो में हिस्सा ले रही हैं। उनके अनुसार इस मंच ने उत्पादों को स्थानीय बाजार से बाहर निकालकर व्यापक और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंच बनाने का अवसर दिया है।






