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यूपी को ‘फार्मा हब’ बनाने की तैयारी…कॉन्क्लेव में हिस्सा लेंगी टॉप कंपनियां, सीएम करेंगे उद्घाटन

तीन फरवरी को राजधानी में होगा आयोजन, बताए जाएंगे यूपी में निवेश के अवसर व उनके फायदे

लखनऊ, 31 जनवरी 2026:

उत्तर प्रदेश को देश का बड़ा फार्मास्यूटिकल व मेडिकल डिवाइस मैन्युफैक्चरिंग केंद्र बनाने की दिशा में योगी सरकार एक और अहम कदम उठाने जा रही है। इसी कड़ी में 3 फरवरी को राजधानी लखनऊ के होटल ताज में ‘फार्मा कॉन्क्लेव 1.0: इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटीज इन उत्तर प्रदेश’ का आयोजन होगा। कॉन्क्लेव उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन और इन्वेस्ट यूपी के सहयोग से किया जा रहा है।

कॉन्क्लेव का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे। केंद्रीय स्वास्थ्य, परिवार कल्याण और रसायन-उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा वीडियो संदेश के जरिए कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। इस मौके पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के साथ कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी और राकेश सचान, राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह, जसवंत सिंह सैनी और राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दया शंकर मिश्र दयालु मौजूद रहेंगे।

देश-दुनिया की बड़ी फार्मा कंपनियों की भागीदारी
एफएसडीए के सचिव और आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के मुताबिक, प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में फार्मा और मेडिकल डिवाइस सेक्टर की अहम भूमिका तय की गई है। इसी मकसद से बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है और निवेश के लिए माहौल आसान बनाया जा रहा है।

फार्मा कॉन्क्लेव 1.0 में देश और विदेश की कई नामी फार्मा कंपनियां हिस्सा लेंगी। इनमें रामकी ग्रुप के चेयरमैन और राज्यसभा सदस्य अयोध्या रामी रेड्डी, सन फार्मा के चेयरमैन दिलीप सांघवी, मैनकाइंड फार्मा के चेयरमैन रमेश जुनेजा, डॉ. रेड्डीज के चेयरमैन डॉ. सतीश रेड्डी, ज़ाइडस लाइफ साइंसेज के चेयरमैन पंकज आर. पटेल और टोरेंट फार्मा के वाइस चेयरमैन जीनल मेहता शामिल हैं।

इसके अलावा एमएसएन लेबोरेटरीज के एमएसएन रेड्डी, डाबर के निदेशक आदित्य वर्मन और एलकेम के निदेशक संदीप सिंह भी अलग-अलग सत्रों में अपने विचार रखेंगे। ये सभी उद्योग जगत के दिग्गज उत्तर प्रदेश में निवेश, उत्पादन, रिसर्च और इनोवेशन की संभावनाओं पर खुलकर चर्चा करेंगे।

कॉन्क्लेव को इंडियन फार्मास्युटिकल अलायंस, इंडियन ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन, बल्क ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, ऑर्गनाइजेशन ऑफ फार्मास्युटिकल प्रोड्यूसर्स ऑफ इंडिया और फेडरेशन ऑफ फार्मा एंटरप्रेन्योर्स जैसे प्रमुख संगठनों का सहयोग मिल रहा है।

डॉ. रोशन जैकब ने बताया कि प्रदेश में यूपी फार्मास्युटिकल और मेडिकल डिवाइस उद्योग नीति 2023 लागू की गई है। इसके तहत निवेशकों को 15 प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी, स्टांप ड्यूटी में पूरी छूट और बिजली शुल्क में राहत दी जा रही है। इसके साथ ही औद्योगिक निवेश और रोजगार प्रोत्साहन नीति 2022, एफडीआई और फॉर्च्यून ग्लोबल 500 निवेश प्रोत्साहन नीति 2023 और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स नीति 2024 से निवेश की राह और आसान हुई है।

इन नीतियों का असर यह है कि ललितपुर में प्रस्तावित बल्क ड्रग पार्क और ग्रेटर नोएडा में मेडिकल डिवाइस पार्क तेजी से आकार ले रहे हैं। प्रदेश में 81 मेडिकल कॉलेज, 450 से अधिक फार्मा कॉलेज और नाइपर रायबरेली, केजीएमयू, एसजीपीजीआई, आईआईटी कानपुर और आईआईटी बीएचयू जैसे संस्थान कुशल मानव संसाधन उपलब्ध करा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में भी अपनी पहचान मजबूत की है। निवेश मित्र जैसे सिंगल विंडो सिस्टम से आवेदन से लेकर परियोजना शुरू होने तक की प्रक्रिया सरल हुई है। एफएसडीए निवेशकों को समय पर मंजूरी और जरूरी नियामकीय सहयोग देने में अहम भूमिका निभा रहा है। इसके साथ ही प्रदेश के पास रेडी-टू-मूव औद्योगिक भूमि का बड़ा बैंक मौजूद है, जो निवेशकों के लिए बड़ी राहत बना है।

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