लखनऊ, 4 फरवरी 2026:
उत्तर प्रदेश में राज्य पक्षी सारस की संख्या लगातार बढ़ रही है। योगी सरकार द्वारा वन और वन्यजीव संरक्षण में किए गए प्रयासों का असर दिखाई दे रहा है। प्रदेश में साल में दो बार (ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन) सारस की गणना की जाती है। इस शीतकालीन सत्र में कुल 20,628 सारस पाए गए, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 19,994 थी।
इटावा में सबसे अधिक 3,304 सारस
राज्यव्यापी गणना में इटावा वन प्रभाग में सबसे अधिक 3,304 सारस पाए गए। इसके अलावा मैनपुरी में 2,899, औरैया में 1,283, शाहजहांपुर में 1,078, गोरखपुर में 950, कन्नौज में 826, कानपुर देहात में 777, हरदोई में 752, सिद्धार्थनगर में 736 और संतकबीर नगर में 701 सारस मिले। कुल 68 वन प्रभागों में यह गणना की गई।
29 प्रभागों में 100 से 500 तक सारस
29 वन प्रभागों में सारस की संख्या 100 से 500 के बीच रही। इनमें रायबरेली में 480, सीतापुर 452, उन्नाव 385, बरेली 380, सोहगीबरवा 378, बाराबंकी 345, बांदा 270, फिरोजाबाद 258, बस्ती 224 और अमेठी 181 सारस पाए गए।
29 प्रभागों में 100 से कम सारस
कुछ प्रभागों में संख्या कम रही। पीलीभीत में 98, हमीरपुर 95, सोहेलवा 88, अयोध्या 82, कुशीनगर 64, हाथरस 62, अंबेडकर नगर 59, मेरठ 51, मुरादाबाद 50, उत्तर खीरी 46, बुलंदशहर 42, कौशांबी 40, ललितपुर 39, अवध 38, मुजफ्फरनगर 32, प्रतापगढ़ 31, कतर्नियाघाट 28, महोबा और संभल 25-25, आगरा 24, नजीबाबाद 18, उरई 15, प्रयागराज 14, आजमगढ़ 12, जौनपुर 8, मऊ 6, पलिया 5, रामपुर 4 और हापुड़ में 2 सारस पाए गए।
10 हजार नागरिकों ने लिया भाग
इस गणना कार्यक्रम में लगभग 10 हजार नागरिकों ने हिस्सा लिया, जिससे राज्यव्यापी आंकड़ों की विश्वसनीयता बढ़ी। वन विभाग कर्मियों ने सारस बाहुल्य क्षेत्रों का सर्वेक्षण कर महत्वपूर्ण क्षेत्रों की पहचान की।
संरक्षण में योगी सरकार का योगदान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर वन्यजीवों के संरक्षण के लिए वन विभाग निरंतर प्रयास कर रहा है। इस प्रयास का परिणाम है कि प्रदेश में सारस की संख्या साल दर साल बढ़ रही है। विभाग ने यह भी सुनिश्चित किया कि शीतकालीन और ग्रीष्मकालीन दोनों गणनाएं नियमित रूप से संपन्न हों।
क्या है भविष्य की रणनीति?
वन विभाग का उद्देश्य केवल संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि सारस के प्राकृतिक आवास और सुरक्षा को सुनिश्चित करना भी है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक अनुराधा वेमुरी के अनुसार, सरकार के संरक्षण प्रयासों से राज्य में वन्यजीवों और पक्षियों के लिए सुरक्षित और समृद्ध वातावरण बन रहा है।






