लखनऊ, 24 नवंबर 2025:
कॉन्वेंट स्कूलों की तुलना में पिछड़े कहे जाने वाले यूपी के परिषदीय विद्यालयों के बच्चे एआई में धुरंधर बनेंगे। ये बच्चे अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कोडिंग और डिजिटल लर्निंग में नई पहचान बनाने जा रहे हैं। बेसिक शिक्षा विभाग ने कक्षा 6 से 8 तक के 20 हजार मेधावी छात्रों को एआई विशेषज्ञ बनाने का बड़ा अभियान शुरू किया है।
इसके तहत पूरे प्रदेश से चुने गए 750 विज्ञान शिक्षकों को आईआईटी कानपुर में 150 घंटे का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इनमें से पहले चरण के 150 शिक्षकों का प्रशिक्षण शुरू भी हो चुका है। उसके बाद दूसरे चरण का प्रशिक्षण होगा।

ये प्रशिक्षित शिक्षक हर जिले में 250–300 छात्रों को कंप्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम, पाइथन प्रोग्रामिंग, साइबर सुरक्षा, एल्गोरिदम, डिजिटल क्रिएटिविटी, ऑनलाइन रिसर्च, मशीन लर्निंग और एआई वॉइस मॉड्यूलेशन जैसे आधुनिक तकनीकी कौशल का वास्तविक और प्रोजेक्ट आधारित प्रशिक्षण देंगे।
इस योजना के तहत जिलों में मिनी टेक्नोलॉजी लैब, हाइब्रिड एआई कक्षाएं और डिजिटल लर्निंग टूल स्थापित किए जा रहे हैं। चार महीनों में यह व्यवस्था पूरी तरह जमीन पर उतारी जाएगी। छात्रों को व्यक्तिगत लर्निंग संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे जिससे वे तकनीक में दक्ष होने के साथ साइबर फ्रॉड से स्वयं और अपने परिवार को सुरक्षित रखने में भी सक्षम बन सकेंगे।
बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह के मुताबिक सरकार का लक्ष्य सरकारी स्कूलों को आधुनिक तकनीक की मुख्यधारा में लाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल वैश्विक स्तर पर पहली बार इतने बड़े पैमाने पर एआई केंद्रित प्रशिक्षण का उदाहरण बनेगी।






