Uttar Pradesh

अब गंदा पानी बनेगा संसाधन : UP में शोधित जल नीति से पानी संकट पर बड़ा वार

योगी कैबिनेट का अहम फैसला, एसटीपी-एफएसटीपी के जरिए अपशिष्ट जल का होगा दोबारा उपयोग, पेयजल पर दबाव घटाने की तैयारी, निर्माण, बागवानी और सिंचाई में बढ़ेगा उपयोग, ड्यूल पाइप सिस्टम से घरों तक पहुंचेगा नॉन-ड्रिंकिंग वॉटर

लखनऊ, 24 मार्च 2026:

यूपी सरकार ने जल संकट से निपटने और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में शोधित जल (ट्रीटेड वॉटर) के सुरक्षित दोबारा उपयोग के लिए नई नीति लागू करने की तैयारी को मंजूरी दी गई है।

इस नीति का मुख्य उद्देश्य घरों और उद्योगों से निकलने वाले अपशिष्ट जल को वैज्ञानिक तरीके से ट्रीट कर दोबारा उपयोग में लाना है। इससे स्वच्छ पेयजल संसाधनों पर बढ़ते दबाव को कम किया जा सके। प्रदेश में तेजी से बढ़ती आबादी और औद्योगिक गतिविधियों के चलते पानी की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यह पहल बेहद अहम मानी जा रही है।

सरकार की योजना के तहत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (एफएसटीपी) के माध्यम से अपशिष्ट जल को शुद्ध किया जाएगा। पहले चरण में इस पानी का उपयोग नगर निकायों, निर्माण कार्यों, बागवानी और सिंचाई में किया जाएगा। दूसरे चरण में इसे उद्योग, कृषि और रेलवे जैसे क्षेत्रों तक विस्तारित किया जाएगा।

तीसरे चरण में ड्यूल पाइप सिस्टम के जरिए घरों तक गैर-पीने योग्य उपयोग के लिए शोधित जल की आपूर्ति सुनिश्चित करने की योजना है। सरकार का मानना है कि इस पहल से पेयजल की बचत होने के सार ही जलाशयों में प्रदूषण भी कम होगा। तकनीक और नवाचार पर आधारित यह नीति उत्तर प्रदेश को जल प्रबंधन के क्षेत्र में एक नई दिशा देने के साथ-साथ ऊर्जा खपत में कमी और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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