लखनऊ, 28 फरवरी 2026:
लखनऊ के गोमतीनगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में उत्तर प्रदेश का पहला मीन महोत्सव (एक्वा एक्सपो–2026) का आयोजन किया गया है। इसका उद्घाटन केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन, डेयरी व पंचायती राज राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल और प्रदेश के कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद ने किया। महोत्सव में देश-प्रदेश के लगभग 1000 मत्स्य पालक, विशेषज्ञ, उद्यमी व निवेशक शामिल हो रहे हैं। 50 प्रतिष्ठित कंपनियों ने औद्योगिक प्रदर्शनी व स्टॉल लगाए हैं। फिश फूड कोर्ट और प्रोटीन जागरूकता कार्यक्रम ने आमजन को मत्स्य उत्पादों के पोषण लाभों से रूबरू कराया।
कार्यक्रम में बताया गया कि उत्तर प्रदेश मत्स्य पालन में देश का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। बीते छह वर्षों में राज्य का वार्षिक मत्स्य उत्पादन दोगुना होकर 13.3 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। केंद्रीय मंत्री प्रो. बघेल ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने में उन्नत मत्स्य पालन अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने मत्स्य पालकों को कृषि दर पर बिजली उपलब्ध कराने और प्रदेश में राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड के सेंटर खोलने की दिशा में कदम बढ़ाने पर जोर दिया।

प्रदेश के मत्स्य मंत्री डॉ. निषाद ने बताया कि राज्य की मत्स्य विकास दर 115.5 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। अमृत सरोवरों को मछली पालन योग्य बनाने, तालाबों के पट्टे समय पर दिलाने और विज्ञान-तकनीक के अधिकतम उपयोग से मत्स्य पालकों को सशक्त किया जाएगा। उन्होंने अनुदान के साथ तकनीकी प्रशिक्षण को भी प्राथमिकता देने की बात कही।
विजन-2047 के तहत प्रदेश को अंतर्देशीय मत्स्य पालन में देश का अग्रणी राज्य बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसी दिशा में वर्ष 2026-27 के बजट में मत्स्य विभाग के लिए 114.20 करोड़ रुपये की नई सहायता स्वीकृत की गई। इसके अंतर्गत राज्य में इंटीग्रेटेड एक्वापार्क और तीन मत्स्य मंडियों की स्थापना के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान है। मोती की खेती को बढ़ावा देने के लिए 3 करोड़ रुपये तथा गोरखपुर में वर्ल्डफिश प्रोजेक्ट सेंटर के लिए 6 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है।
तकनीकी सत्रों में मत्स्य बीज उत्पादन, कैट फिश फार्मिंग, झींगा पालन, केज कल्चर और ऑर्नामेंटल फिश फार्मिंग जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने प्रेजेंटेशन दिए। आयोजकों का कहना है कि यह महोत्सव प्रदेश में मत्स्य पालन को औद्योगिक स्तर पर नई दिशा देगा। प्रसंस्करण व मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने के साथ आने वाले वर्षों में किसानों की आय में ठोस बढ़ोतरी का रास्ता खुलेगा।






