Uttar Pradesh

वैश्विक बौद्ध आस्था का केंद्र बना UP : बुद्ध की धरती पर उमड़ा विश्व, कुशीनगर विदेशी श्रद्धालुओं की पहली पसंद

गत वर्ष राज्य के बौद्ध सर्किट ने देश-विदेश से लगभग 82 लाख पर्यटकों को किया आकर्षित, कुशीनगर में 2.90 लाख से अधिक विदेशी श्रद्धालु पहुंचे, यूपी टूरिज्म फैम ट्रिप और विदेशी आयोजनों में सहभाग के जरिए बौद्ध बहुल देशों को कर रहा आकर्षित

लखनऊ, 22 फरवरी 2026:

यूपी ने वर्ष 2025 में बौद्ध पर्यटन के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए खुद को वैश्विक आस्था के प्रमुख केंद्र के रूप में मजबूती से स्थापित किया है। राज्य के बौद्ध सर्किट ने देश-विदेश से लगभग 82 लाख पर्यटकों को आकर्षित किया। इनमें 4.40 लाख से अधिक विदेशी श्रद्धालु शामिल रहे। लगातार बढ़ते आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि प्रदेश अब विश्व बौद्ध मानचित्र पर तेजी से उभर रहा है।

प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि दुनिया भर के बौद्ध धर्मावलंबी अपनी ‘बोधि यात्रा’ की शुरुआत उत्तर प्रदेश से करना पसंद कर रहे हैं। कुशीनगर, सारनाथ, कपिलवस्तु, श्रावस्ती, संकिसा और कौशांबी जैसे पवित्र स्थल भगवान बुद्ध के जीवन और संदेश से जुड़े होने के कारण श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक यात्रा का केंद्र बन चुके हैं।

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विदेशी पर्यटकों की पहली पसंद के रूप में उभरे कुशीनगर में वर्ष 2025 के दौरान 2.90 लाख से अधिक विदेशी श्रद्धालु पहुंचे। इससे पहले 2024 में 2.51 लाख, 2023 में 2.14 लाख और 2022 में 41 हजार से अधिक विदेशी पर्यटकों ने यहां आकर आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त की थी। राज्य के अन्य बौद्ध स्थलों पर भी पर्यटकों की संख्या में निरंतर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 2022 में जहां 22.40 लाख पर्यटक पहुंचे थे, वहीं 2023 में यह आंकड़ा 47 लाख, 2024 में 61 लाख और 2025 में 82 लाख तक पहुंच गया।

मंत्री ने बताया कि सीएम योगी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने इनबाउंड टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए बहुआयामी रणनीति अपनाई है। फैम ट्रिप्स, अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भागीदारी और बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण जैसे प्रयासों का असर अब साफ नजर आ रहा है।

केंद्रीय बजट 2026-27 में सारनाथ को देश के 15 प्रमुख पुरातात्विक स्थलों में शामिल कर ‘एक्सपेरिमेंटल कल्चर डेस्टिनेशन’ के रूप में विकसित करने की घोषणा ने भी उम्मीदों को नई उड़ान दी है। इसके साथ ही जापान समेत श्रीलंका, थाईलैंड, म्यांमार, कंबोडिया, लाओस पीडीआर, वियतनाम और दक्षिण कोरिया से आने वाले श्रद्धालुओं की बढ़ती आमद यह संकेत देती है कि उत्तर प्रदेश अब वैश्विक बौद्ध पर्यटन का मजबूत केंद्र बन चुका है।

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