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यूपी बना अब रोजगार का भरोसेमंद ठिकाना, जानिए कैसे पलायन से परावर्तन तक बदली राज्य की तस्वीर

यूपी में रोजगार, निवेश और सामाजिक सुरक्षा से उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदली है। जहां कभी पलायन मजबूरी था, वहीं अब जिले-जिले में अवसर मिलने से परावर्तन का दौर शुरू हो चुका है

लखनऊ, 20 जनवरी 2026:

उत्तर प्रदेश को अब विकास और रोजगार का मजबूत उदाहरण माना जा रहा है। बीते पौने नौ वर्षों में सरकार की नीतियों का असर साफ दिख रहा है। पहले जहां युवा और श्रमिक नौकरी, शिक्षा, इलाज और सुरक्षा के लिए प्रदेश छोड़ने को मजबूर थे, अब उन्हें अपने ही जिले में बेहतर अवसर मिल रहे हैं। यही कारण है कि बाहर गए लोग अब वापस लौट रहे हैं और पलायन की जगह परावर्तन का दौर शुरू हो चुका है।

रोजगार सृजन से थमा पलायन का सिलसिला

योगी सरकार के कार्यकाल में औद्योगिक निवेश, एमएसएमई विस्तार, रोजगार मेलों और कौशल विकास योजनाओं के जरिये बड़े पैमाने पर नौकरियां पैदा हुई हैं। बेरोजगारी दर में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। सरकारी और निजी क्षेत्र में लाखों युवाओं को रोजगार मिला है। सेवायोजन विभाग के सेवामित्र पोर्टल पर अब तक 53 हजार से अधिक कुशल कामगार पंजीकृत हो चुके हैं, जिन्हें सीधे रोजगार से जोड़ा जा रहा है। इससे युवाओं को बाहर जाने की जरूरत कम हुई है।

निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर ने बदली तस्वीर

इन्वेस्ट यूपी के सिंगल विंडो सिस्टम और सरल प्रक्रियाओं ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। एक्सप्रेसवे नेटवर्क, एयरपोर्ट, औद्योगिक कॉरिडोर, डिफेंस कॉरिडोर, मेडिकल कॉलेज और लॉजिस्टिक्स हब जैसे प्रोजेक्ट्स से उद्योग अब जिलों तक पहुंच गए हैं। प्रदेश आज रोजगार और फैक्ट्रियों के मामले में देश के शीर्ष राज्यों में शामिल है। फिलहाल उत्तर प्रदेश में 30 हजार से अधिक फैक्ट्रियां संचालित हो रही हैं, जबकि 2017 से पहले यह संख्या इसकी आधी भी नहीं थी। इससे स्थानीय स्तर पर स्थायी रोजगार के अवसर तेजी से बढ़े हैं।

श्रमिक कल्याण और सामाजिक सुरक्षा पर खास जोर

योगी सरकार ने रोजगार के साथ-साथ श्रमिकों और उनके परिवारों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी है। पंजीकृत श्रमिकों के बच्चों और कोविड काल में निराश्रित हुए बच्चों के लिए हर मंडल में अटल आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। इन विद्यालयों में 100 बालक और बालिकाओं को आवासीय शिक्षा दी जा रही है, जिससे श्रमिक परिवारों का भविष्य सुरक्षित हो रहा है।

दुर्घटना और मृत्यु पर आर्थिक सुरक्षा

सरकार ने श्रमिकों के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। कार्यस्थल पर मृत्यु होने पर 5 लाख रुपये, स्थायी दिव्यांगता पर 3 लाख रुपये, आंशिक दिव्यांगता पर 2 लाख रुपये, पंजीकृत श्रमिक की दुर्घटना मृत्यु पर 5 लाख रुपये और सामान्य मृत्यु पर 2 लाख रुपये की सहायता दी जा रही है। इसके अलावा 25 हजार रुपये अंत्येष्टि सहायता और अपंजीकृत श्रमिक की दुर्घटना या मृत्यु पर 1.25 लाख रुपये की मदद का प्रावधान है। इन योजनाओं से श्रमिकों में सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है।

पेंशन, स्वास्थ्य और परिवार सुरक्षा का मजबूत ढांचा

प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना, अटल पेंशन योजना, मातृत्व, शिशु और बालिका मदद योजना तथा निर्माण कामगार मृत्यु और दिव्यांगता सहायता योजना से लाखों लोग जुड़े हैं। कन्या विवाह सहायता योजना के तहत दो बेटियों के विवाह पर 55 हजार से 61 हजार रुपये तक की सहायता दी जा रही है। प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत प्रदेश में 9.52 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले जा चुके हैं। निर्माण कामगार गंभीर बीमारी सहायता योजना के अंतर्गत सरकारी अस्पतालों में इलाज का पूरा खर्च सरकार उठा रही है। इन सुविधाओं से श्रमिक परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य और आर्थिक सुरक्षा उत्तर प्रदेश में ही मिल रही है।

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