राजकिशोर तिवारी
देहरादून, 22 जनवरी 2026:
उत्तराखंड में 19 जनवरी को पूर्व मंत्री और किच्छा से कांग्रेस विधायक तिलक राज बेहड़ के छोटे बेटे और वार्ड 39 पार्षद सौरभ बेहड़ पर हुए हमले का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पुलिस जांच में सामने आया कि हमला किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं किया, बल्कि सौरभ ने स्वयं अपने ऊपर हमले की साजिश रची थी। इसके पीछे परिवारिक विवाद को मुख्य कारण बताया जा रहा है।
साजिश में शामिल दोस्त गिरफ्तार
जांच के दौरान सौरभ के करीबी दोस्त इंद्र और अन्य तीन युवकों को गिरफ्तार किया गया है, जिनके माध्यम से हमले की योजना बनाई गई थी। पुलिस के अनुसार यह मामला पहले इलाके में कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा था और कांग्रेस ने भी सरकार पर मोर्चा खोल दिया था।
पूर्व मंत्री ने मांगी माफी
मामले की सच्चाई सामने आने के बाद पूर्व मंत्री और मौजूदा विधायक तिलक राज बेहड़ ने जनता के सामने माफी मांगी। उन्होंने कहा कि परिस्थितियों और गलतफहमियों के कारण भ्रम की स्थिति बनी, जिसके लिए वे खेद व्यक्त करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में किसी भी तरह की अफवाहों से बचते हुए सच्चाई सामने लाना जरूरी है।

कांग्रेस भी बैकफुट पर
मामले के खुलासे के बाद कांग्रेस ने अब अपनी प्रतिक्रिया पर फिलहाल नियंत्रण रखा है। पुलिस प्रशासन अब मामले की आगे की कार्रवाई कर रहा है और साजिश में शामिल सभी लोगों से पूछताछ जारी है।
भाजपा का कांग्रेस पर हमला: कानून-व्यवस्था पर फैलाई अफवाहों की निंदा
किच्छा विधायक के पुत्र सौरभ बेहड़ प्रकरण में भाजपा ने कांग्रेस को घेर लिया है। प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने कहा कि मामले की सच्चाई सामने आने के बाद कांग्रेस को जनता से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस हर मामले में कानून-व्यवस्था को लेकर दुष्प्रचार करती रही है और रुद्रपुर की घटना इसके स्पष्ट उदाहरण के रूप में सामने आई। चौहान ने कहा कि कांग्रेस लगातार पुलिस पर सवाल उठाकर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की नकारात्मक छवि पेश करती रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अंकिता हत्याकांड में कांग्रेस दावा कर रही थी कि आरोपी आसानी से छूट जाएंगे, लेकिन कड़ी पैरवी और ठोस तथ्यों के चलते आरोपी आजीवन कारावास भुगत रहे हैं और बेल भी नहीं मिली।

उन्होंने कांग्रेस से अपील की कि जांच एजेंसियों के मनोबल को कमजोर करने की नीति से बाज आए। अब जनता की शिकायतें सीधे थाने-चौकी से लेकर मुख्यमंत्री तक पोर्टल के माध्यम से सुनी जा रही हैं, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो रही है।






