योगेंद्र मलिक
देहरादून, 16 फरवरी 2026:
केंद्र सरकार की ओर से कारोबार में सुगमता बढ़ाने के उद्देश्य से गठित टास्क फोर्स की अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की सचिव मीता राजीव लोचन तथा मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में सोमवार को सचिवालय में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (फेज-2) के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की गई। बैठक में बताया गया कि उत्तराखंड ने डी-रेगुलेशन 1.0 कम्प्लायंस रिडक्शन में देश में पांचवां स्थान हासिल कर राज्य की प्रशासनिक सुधार यात्रा को नई गति दी है।
मीता राजीव लोचन ने राज्य सरकार की सिंगल विंडो प्रणाली, भूमि उपयोग, होम-स्टे नीति, उद्यमिता और श्रम सुधारों की खुलकर सराहना की। उन्होंने बताया कि फेज-2 के तहत उत्तराखंड के लिए 9 प्राथमिकताएं तय की गई हैं जिनमें भूमि उपयोग से जुड़े सरलीकरण, भवन एवं निर्माण स्वीकृतियों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम, पर्यावरणीय मंजूरियां और पर्यटन क्षेत्र में नवाचार जैसे अहम सुधार शामिल हैं। इन पहलों का उद्देश्य विकास परियोजनाओं को तेजी देना, निवेश को आकर्षित करना और आधारभूत ढांचे को मजबूत करना है।
उन्होंने उद्योग से जुड़े प्रस्तावों को तय समय-सीमा में स्वीकृति देने के लिए प्रभावी तंत्र बनाने और छोटे उद्योगों के लिए सेल्फ-सर्टिफिकेशन व्यवस्था लागू करने पर जोर दिया ताकि लघु निवेशकों को राहत मिल सके। बैठक में बताया गया कि राज्य का विनिर्माण क्षेत्र सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) में लगभग 26 प्रतिशत योगदान देता है जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। साथ ही इस क्षेत्र का करीब 65 प्रतिशत हिस्सा औपचारिक रूप से पंजीकृत औद्योगिक इकाइयों द्वारा संचालित किया जा रहा है।
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि निवेशकों के अनुकूल माहौल बनाने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम को और सशक्त किया जा रहा है। भवन एवं निर्माण, बिजली, श्रम, अग्निशमन, पर्यटन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में विभागीय समन्वय के साथ सुधार लागू किए जा रहे हैं। उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिए कि फेज-2 के तहत केंद्र सरकार द्वारा तय मानकों का समयबद्ध और सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए ताकि उत्तराखंड तेज़ी से उभरता निवेश गंतव्य बन सके।






