वाराणसी, 30 मार्च 2026:
31 मार्च को होने वाला एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन इस बार कई मायनों में अहम रहने वाला है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में यह आयोजन अंतरराज्यीय सहयोग को जमीन पर उतारने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। सम्मेलन में व्यापार, निवेश, पर्यटन और स्थानीय उत्पादों को एक साथ जोड़ने की कोशिश दिखेगी।
यह सम्मेलन दोनों राज्यों के बीच आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग को नई दिशा देने की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। कार्यक्रम की शुरुआत काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के अध्ययन दौरे से होगी। इस दौरान भीड़ प्रबंधन, ढांचा और तीर्थ यात्रियों की सुविधाओं को करीब से देखा जाएगा। इस मॉडल के आधार पर मध्य प्रदेश में धार्मिक स्थलों के विकास की नई योजनाओं पर काम किया जाएगा, ताकि तीर्थ पर्यटन को बेहतर ढंग से व्यवस्थित किया जा सके।

सम्मेलन में ओडीओपी, जीआई टैग उत्पाद, पारंपरिक शिल्प और कृषि-फूड सेक्टर पर खास जोर रहेगा। उत्तर प्रदेश के ओडीओपी मॉडल को उदाहरण के तौर पर पेश किया जाएगा, जिससे यह समझाया जा सके कि स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक कैसे पहुंचाया जा सकता है। दोनों राज्यों के उत्पादों को एक साझा ब्रांडिंग के तहत आगे बढ़ाने पर भी चर्चा होगी।
इस दौरान मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच कई एमओयू पर हस्ताक्षर होंगे। इनमें व्यापार, औद्योगिक निवेश, कौशल विकास, हस्तशिल्प और पर्यटन जैसे क्षेत्र शामिल हैं। मकसद यह है कि समझौते सिर्फ कागज तक सीमित न रहें, बल्कि सीधे उद्यमियों और कारीगरों तक उसका फायदा पहुंचे।
सम्मेलन में उद्योग जगत, निवेशक, शिल्पकार और नीति से जुड़े लोग एक मंच पर नजर आएंगे। लॉजिस्टिक्स, एमएसएमई, वस्त्र, खाद्य प्रसंस्करण और पर्यटन जैसे सेक्टर में संभावनाओं पर चर्चा होगी। इससे सरकार और उद्योग के बीच तालमेल मजबूत करने की कोशिश की जाएगी।
प्रदर्शनी भी इस आयोजन का अहम हिस्सा होगी, जिसमें मध्य प्रदेश के ओडीओपी उत्पाद, जीआई टैग हस्तशिल्प, पारंपरिक कपड़े और पर्यटन स्थलों को एक साथ दिखाया जाएगा। इसका मकसद निवेशकों को राज्य की वास्तविक क्षमता से रूबरू कराना है।
जॉइंट आर्टिजन वर्कशॉप में चंदेरी और महेश्वरी के कारीगर बनारसी सिल्क शिल्पियों के साथ मिलकर काम करेंगे। यहां साझा ब्रांडिंग और बाजार विस्तार पर चर्चा होगी। गंगा-नर्मदा क्राफ्ट कॉरिडोर की अवधारणा को भी आगे बढ़ाने की योजना है, जिससे कारीगरों को सीधे बाजार से जोड़ने का रास्ता बने।
टूरिज्म राउंड टेबल में काशी, उज्जैन और चित्रकूट को जोड़कर धार्मिक पर्यटन सर्किट बनाने पर बातचीत होगी। इसमें टूर ऑपरेटर और आईआरसीटीसी जैसे संस्थान भी शामिल रहेंगे, ताकि एक संगठित पर्यटन मॉडल तैयार किया जा सके।






