बिजनेस डेस्क, 23 मार्च 2026:
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब सीधे ऊर्जा और करेंसी बाजार पर दिख रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच भारतीय रुपया भी दबाव में आ गया है और डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 112 डॉलर प्रति बैरल के पार बना हुआ है। हालांकि वायदा कारोबार में हल्की गिरावट दिखी, लेकिन कीमतें अब भी ऊंचे स्तर पर टिकी हैं। इसकी बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तनातनी मानी जा रही है।
दोनों देशों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर सख्त रुख अपनाया जा रहा है। ईरान ने साफ किया है कि अगर उसके ठिकानों पर हमला हुआ तो वह इस अहम समुद्री रास्ते को बंद कर सकता है। यह मार्ग दुनिया के प्रमुख तेल सप्लाई रूट्स में शामिल है, ऐसे में किसी भी रुकावट का असर सीधे सप्लाई और कीमतों पर पड़ सकता है।
इधर, इसी दबाव का असर भारतीय मुद्रा पर भी पड़ा है। इंटरबैंक फॉरेक्स मार्केट में रुपया 41 पैसे टूटकर 93.94 प्रति डॉलर पर पहुंच गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। फॉरेक्स बाजार के जानकार मानते हैं कि कच्चे तेल की महंगाई से भारत का आयात बिल बढ़ा है। इससे डॉलर की मांग तेज हुई और रुपये पर दबाव बढ़ गया। साथ ही ग्लोबल स्तर पर डॉलर मजबूत बना हुआ है, जिससे उभरते बाजारों की मुद्राएं कमजोर हुई हैं।
घरेलू शेयर बाजार में गिरावट और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भी हालात को और बिगाड़ा है। निवेशक जोखिम से बचने के लिए पैसा निकाल रहे हैं, जिससे बाजार में उतार चढ़ाव बना हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इलाके में सैन्य गतिविधियां भी तेज हुई हैं। अमेरिका ने अतिरिक्त मरीन और नौसैनिक तैनात किए हैं, जिससे तनाव और बढ़ गया है। इसका असर आने वाले दिनों में तेल और करेंसी बाजार पर बना रह सकता है।






