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गांव-गांव दुग्ध क्रांति : UP की एक लाख महिलाएं बनीं ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई धुरी

छह जिलों की महिलाएं रोज कर रहीं पौने चार लाख लीटर दूध का कारोबार, इनमें 14,500 महिलाएं बनीं ‘लखपति दीदी’, जनपद अयोध्या, सुल्तानपुर, रायबरेली, अमेठी, प्रतापगढ़ और कानपुर नगर की महिलाओं ने अर्जित किया 14 करोड़ रुपये का लाभांश

लखनऊ, 15 फरवरी 2026:

यूपी की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में चुपचाप लेकिन मजबूत बदलाव की लहर उठ चुकी है। कभी घरेलू दायरे तक सीमित रहने वाली महिलाएं आज गांवों की आर्थिक धुरी बन रही हैं। अयोध्या, सुल्तानपुर, रायबरेली, अमेठी, प्रतापगढ़ और कानपुर नगर के करीब 1500 गांवों की एक लाख महिलाओं ने संगठित डेयरी मॉडल अपनाकर अपनी आय बढ़ाने के साथ गांवों में नकदी प्रवाह और रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं।

इस महिला आधारित नेटवर्क के तहत सामर्थ्य मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी ने अब तक लगभग 850 करोड़ रुपये का कारोबार दर्ज किया है। नेटवर्क से जुड़ी महिलाएं रोजाना करीब पौने चार लाख लीटर दूध का संग्रहण कर रही हैं। नियमित खरीद, समय पर भुगतान और पारदर्शी व्यवस्था ने डेयरी को गांवों में स्थायी आजीविका के रूप में स्थापित कर दिया है।

आंकड़े बताते हैं कि इस मॉडल से महिलाओं की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। खास बात यह है कि 14,500 महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। डेयरी से जुड़े समूहों को अब तक करीब 14 करोड़ रुपये का लाभांश वितरित किया गया है, जिससे परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। कई गांवों में महिलाओं ने बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और घर की जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से संभालना शुरू कर दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ आय बढ़ाने की कहानी नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव की तस्वीर है। दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रो. दीप्ति तनेजा के अनुसार 1500 गांवों की महिलाओं द्वारा 850 करोड़ रुपये का कारोबार ग्रामीण अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक बदलाव का संकेत है। रोजाना पौने चार लाख लीटर दूध के कारोबार से गांवों में बेहतर नकदी प्रवाह बन रहा है और स्थानीय बाजारों में गतिविधियां तेज हुई हैं।

इस पहल का मूल उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और गांवों में आय के नए स्रोत खड़े करना है। महिला-आधारित डेयरी नेटवर्क का यह मॉडल आने वाले समय में प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और रफ्तार देगा और महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनेगा।

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