लखनऊ, 25 जनवरी 2026:
कभी सूखा, संघर्ष और पलायन के लिए जाना जाने वाला बुन्देलखण्ड आज ग्रामीण महिलाओं की मेहनत और संगठित प्रयासों के चलते आत्मनिर्भरता की नई पहचान गढ़ रहा है। सरकार की योजनाबद्ध पहल से इस क्षेत्र में डेयरी वैल्यू चेन महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का सबसे भरोसेमंद माध्यम बनकर उभरी है।
बुन्देलखण्ड के चित्रकूट, झांसी, बांदा, हमीरपुर, जालौन, महोबा और ललितपुर जनपदों में दुग्ध व्यवसाय से जुड़कर 86 हजार से अधिक ग्रामीण महिलाएं आज अपनी आमदनी बढ़ाने के साथ गांव की अर्थव्यवस्था को भी नई गति दे रही हैं। डेयरी वैल्यू चेन परियोजना के तहत 952 गांवों में 3,600 स्वयं सहायता समूहों को संगठित किया गया है। इससे महिलाओं को सामूहिक शक्ति और स्थायी रोजगार का आधार मिला है।

बुन्देलखण्ड में दुग्ध व्यवसाय को संगठित, पारदर्शी और लाभकारी बनाने के लिए महिला दुग्ध उत्पादकों की प्रोड्यूसर कंपनी ‘बालिनी’ का गठन किया गया। यह कंपनी पूरी तरह महिलाओं द्वारा संचालित है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह हुआ कि अब दुग्ध उत्पादक महिलाएं बिचौलियों की निर्भरता से मुक्त हो गई हैं। दूध संग्रह से लेकर गुणवत्ता परीक्षण, डिजिटल भुगतान और बाजार तक सीधे पहुंच की व्यवस्था ने उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है।
‘बालिनी’ मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी के माध्यम से तैयार उत्पादों को उचित मूल्य और स्थायी बाजार मिल रहा है। इससे न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है बल्कि गांवों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं। पशुपालन, चारा उत्पादन, परिवहन और विपणन जैसी गतिविधियों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिली है।
योगी सरकार की मंशा स्पष्ट है कि ग्रामीण विकास की धुरी महिलाओं की आर्थिक मजबूती बने। इसी सोच के तहत बुन्देलखण्ड में डेयरी परियोजनाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। आज ‘बालिनी’ सिर्फ एक डेयरी मॉडल नहीं, बल्कि यह साबित कर रही है कि सही मार्गदर्शन, सामूहिक प्रयास और सरकारी समर्थन से ग्रामीण महिलाएं बड़े आर्थिक बदलाव की वाहक बन सकती हैं।
बुन्देलखण्ड में डेयरी वैल्यू चेन की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि सीएम योगी के नेतृत्व में चल रही योजनाएं जमीन पर असर दिखा रही हैं। गांव की महिलाएं अब क्षेत्र की तरक्की की सबसे मजबूत कड़ी बन चुकी हैं।






