लखनऊ, 23 जनवरी 2026:
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को प्रदेश में कम्प्लायंस रिडक्शन और डी-रेगुलेशन फेज-II के तहत हो रहे सुधारों की उच्चस्तरीय समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि शासन का उद्देश्य आम नागरिकों और उद्यमियों को अनावश्यक नियमों, अनुमतियों और निरीक्षणों से राहत देना है, ताकि प्रशासन भरोसे, पारदर्शिता और समयबद्धता पर आधारित बन सके।
कागज नहीं, जमीन पर दिखें सुधार
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किए जा रहे सुधार केवल फाइलों तक सीमित न रहें, बल्कि आम लोगों को जमीन पर उनका असर दिखना चाहिए। उन्होंने कहा कि नागरिकों को यह अनुभव होना चाहिए कि सरकारी प्रक्रियाएं पहले से आसान और तेज हुई हैं।
फेज-II में संस्थागत सुधारों पर फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि कम्प्लायंस रिफॉर्म्स के पहले फेज में उत्तर प्रदेश ने देश में मजबूत पहचान बनाई है। अब फेज-II के माध्यम से इन सुधारों को स्थायी और संस्थागत रूप देना जरूरी है। यह फेज सिर्फ नियम बदलने का नहीं, बल्कि प्रशासन की सोच और काम करने के तरीके में बदलाव का माध्यम है।

डी-रेगुलेशन का सही अर्थ
मुख्यमंत्री ने साफ किया कि डी-रेगुलेशन का मतलब नियंत्रण समाप्त करना नहीं है। इसका उद्देश्य अनावश्यक नियंत्रण हटाकर जरूरी नियमों को सरल और पारदर्शी बनाना है। सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस दोनों में अग्रणी राज्य बनाना है।
जमीन, भवन और उद्योग से जुड़े सुधार
बैठक में बताया गया कि भूमि उपयोग से जुड़ी जटिल अनुमतियों को समाप्त या सरल किया जा रहा है, ताकि किसानों और भू स्वामियों को अनावश्यक परेशानी न हो। नियोजित क्षेत्रों में मास्टर प्लान के अनुरूप भूमि उपयोग पर अलग अनुमति की जरूरत खत्म करने और अनियोजित क्षेत्रों में भी प्रक्रिया को सरल बनाने पर काम हो रहा है।
भवन निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाओं जैसे नक्शा पास, लेआउट और कंप्लीशन सर्टिफिकेट को रिस्क बेस्ड सिस्टम पर लाया जा रहा है, जहां सेल्फ सर्टिफिकेशन और डीम्ड अप्रूवल को बढ़ावा दिया जाएगा।
डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑटो अप्रूवल
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि अलग अलग विभागों की प्रक्रियाओं को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जाए और हर काम की समयसीमा तय हो। बिजली कनेक्शन, लोड बढ़ाने और अन्य तकनीकी अनुमतियों में ऑनलाइन और ऑटो अप्रूवल सिस्टम को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि औद्योगिक गतिविधियों को गति मिले।
आम नागरिक को मिलेगा सीधा लाभ
पर्यावरण, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी अनुमतियों को भी सरल किया जा रहा है। कम जोखिम वाली गतिविधियों में अनावश्यक क्लीयरेंस हटाई जा रही है, जबकि उच्च जोखिम वाले मामलों में संतुलन के साथ समयबद्ध प्रक्रिया अपनाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये सुधार सिर्फ निवेशकों के लिए नहीं, बल्कि आम नागरिक के लिए भी हैं, चाहे वह घर बनाना हो, बिजली पानी का कनेक्शन लेना हो या किसी छोटी सेवा की अनुमति।






