Lucknow City

बाबा साहब का अस्थि कलश हटाने की कोशिश हुई तो देशव्यापी आंदोलन! डॉ. अंबेडकर के पौत्र ने दी चेतावनी

लखनऊ में डॉ. भीमराव अंबेडकर की विरासत बचाने को जुटे लोग, बुद्ध विहार और अस्थि कलश के प्रस्तावित स्थानांतरण के विरोध में बुलंद की आवाज, निकला पैदल मार्च

लखनऊ, 8 जुलाई 2026:

यूपी की राजधानी लखनऊ में बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की विरासत से जुड़े पवित्र अस्थि कलश और बुद्ध विहार के प्रस्तावित स्थानांतरण के विरोध में सोमवार को जनआक्रोश देखने को मिला। विधानभवन के निकट स्थित भारत रत्न बोधिसत्व बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर महासभा परिसर में आयोजित प्रेस वार्ता में बाबा साहब के पौत्र भीमराव यशवंत राव अंबेडकर ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई तो अस्थि कलश रथ यात्रा के माध्यम से पूरे देश में व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा।

यशवंत राव अंबेडकर ने कहा कि उनकी दादी माई साहब डॉ. सविता अंबेडकर द्वारा स्थापित यह अस्थि कलश केवल एक स्मारक नहीं अपितु बाबा साहब की समाधि और करोड़ों अनुयायियों की आस्था का केंद्र है। उन्होंने कहा कि इस पवित्र स्थल को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने का प्रयास सामाजिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के साथ अन्याय होगा। इसे समाज किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा।

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उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा बाबा साहब से जुड़े पंचतीर्थ स्थलों के संरक्षण और विकास का उल्लेख करते हुए मांग की कि लखनऊ स्थित इस ऐतिहासिक स्थल को भी विशेष संरक्षण प्रदान किया जाए। इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाते हुए विश्व धरोहर के रूप में विकसित किया जाए। उनका कहना था कि यह स्थल केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि देश-दुनिया में फैले बाबा साहब के अनुयायियों की भावनाओं से जुड़ा हुआ है।

इसके बाद डॉ. अंबेडकर संवैधानिक महासंघ के अध्यक्ष राजेश कुमार सिद्धार्थ के नेतृत्व में अंबेडकर महासभा से हजरतगंज स्थित बाबा साहब की प्रतिमा तक पैदल मार्च निकाला गया। बड़ी संख्या में शामिल अनुयायियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने अस्थि कलश एवं बुद्ध विहार के संरक्षण के समर्थन में एकजुटता दिखाई।

मार्च के दौरान डॉ. अंबेडकर अमर रहें के नारों से वातावरण गूंज उठा। प्रदर्शनकारियों ने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की कि महासभा परिसर में स्थित अस्थि कलश और बुद्ध विहार को वर्तमान स्वरूप और स्थान पर ही सुरक्षित रखा जाए। इसके संरक्षण और वैश्विक पहचान के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

इस अवसर पर समता सैनिक दल के पीपी सिंह, प्रो. रामनरेश चौधरी, एडवोकेट जगदीश गवई, पीसी कुरील, भीम आर्मी सामाजिक संगठन के अनीकेत धानुक सहित कई अनुयायी, बुद्धिजीवी और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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