लखनऊ, 18 जून 2026:
यूपी की बेटियां अब राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों तक अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं। योगी सरकार बालिका शिक्षा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयासरत है। इसी कड़ी में आईआईटी गांधीनगर, गुजरात द्वारा संचालित ‘क्यूरियोसिटी प्रोग्राम 2026-27’ के तहत आयोजित विशेष ओरिएंटेशन कार्यक्रम के लिए प्रदेश के दो कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों का चयन किया गया है। यह उपलब्धि प्रदेश की बालिकाओं की प्रतिभा, विद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता और सरकार की शिक्षा-केंद्रित नीतियों का प्रमाण मानी जा रही है।
विभाग के निर्देशों के अनुसार 13 से 15 जुलाई तक आईआईटी गांधीनगर में आयोजित होने वाले इस विशेष कार्यक्रम में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय कौड़िहार-1, प्रयागराज तथा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय लोनी (नगर पालिका), गाजियाबाद की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। हर विद्यालय से दो छात्राएं और एक शिक्षिका इस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगी। चयनित छात्राओं को देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में सीखने, समझने और नवाचार की दुनिया से परिचित होने का अवसर मिलेगा।
आईआईटी गांधीनगर के सेंटर फॉर क्रिएटिव लर्निंग (सीसीएल) द्वारा भेजे गए पत्र के अनुसार इन विद्यालयों का चयन पूरे वर्ष क्यूरियोसिटी कार्यक्रम में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर किया गया है। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय कौड़िहार-1, प्रयागराज ने कार्यक्रम के 50 में से 46 सत्रों में भाग लेते हुए 92 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज की और 48 में से 39 वर्कशीट जमा कराईं। वहीं केजीबीवी लोनी, गाजियाबाद ने 50 में से 49 सत्रों में भाग लेकर 98 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज की तथा 48 में से 42 वर्कशीट जमा कराईं। बेहतर सहभागिता और शानदार प्रदर्शन ने दोनों विद्यालयों को राष्ट्रीय स्तर के इस प्रतिष्ठित अवसर तक पहुंचाया।
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को विज्ञान, गणित, नवाचार, रचनात्मक अधिगम और समस्या-समाधान आधारित गतिविधियों का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा। वे आईआईटी के शैक्षणिक वातावरण, शोध संस्कृति और आधुनिक शिक्षण मॉडल को नजदीक से समझ सकेंगी। इससे उनमें वैज्ञानिक सोच विकसित होगी। जिज्ञासा को नई दिशा मिलेगी और उच्च शिक्षा के प्रति आत्मविश्वास बढ़ेगा।
प्रदेश सरकार कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों को बालिका सशक्तीकरण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मजबूत केंद्रों के रूप में विकसित कर रही है। डिजिटल शिक्षण, नवाचार आधारित गतिविधियां, विज्ञान एवं गणित कार्यक्रमों तथा राष्ट्रीय संस्थानों से जुड़ाव जैसी पहलों का ही परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश की बेटियां बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। विशेष रूप से ग्रामीण और वंचित पृष्ठभूमि से आने वाली छात्राओं के लिए यह अवसर भविष्य के वैज्ञानिक, शोधकर्ता और नवप्रवर्तक बनने की राह खोलने वाला साबित होगा।






