
लखनऊ, 26 जून 2026:
यूपी सरकार ने बेसिक शिक्षा में गुणवत्ता सुधार और निपुण भारत मिशन को गति देने के लिए ब्लॉक स्तर की अकादमिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। समग्र शिक्षा के तहण संचालित ब्लॉक संसाधन केंद्रों (बीआरसी) की व्यवस्था का व्यापक पुनर्गठन करते हुए अकादमिक रिसोर्स पर्सन्स (एआरपी) प्रणाली को नई संरचना दी गई है। एआरपी के चयन, कार्यदायित्व, प्रशिक्षण, मूल्यांकन और जवाबदेही के विस्तृत प्रावधान तय किए गए हैं।
इस बारे में प्रदेश के बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से शासनादेश जारी किया गया है। स्कूल शिक्षा महानिदेशक एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी ने सभी बीएसए को जुलाई तक सभी रिक्त एआरपी पदों पर चयन प्रक्रिया पूरी करने के
निर्देश दिए हैं। इससे नए शैक्षणिक सत्र से ब्लॉक स्तर का अकादमिक सहयोग तंत्र पूरी क्षमता के साथ कार्य शुरू कर सकेगा।
नई व्यवस्था के तहत हर ब्लॉक में पांच चयनित एआरपी और एक नामित डायट मेंटर मिलकर शैक्षणिक सहायता टीम का गठन करेंगे। यह टीम विद्यालयों में शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं को मजबूत करने, शिक्षकों को सतत शैक्षणिक सहयोग देने, कक्षा-कक्ष की चुनौतियों का समाधान कराने और विद्यार्थियों के अधिगम स्तर में सुधार की दिशा में काम करेगी।
सरकार ने चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यावहारिक बनाने के लिए कई अहम बदलाव किए हैं। अब एआरपी का चयन पूरी तरह मेरिट आधारित होगा। सेवानिवृत्ति में केवल पांच वर्ष शेष रहने वाले शिक्षक भी आवेदन के पात्र होंगे। पहले यह सीमा 10 वर्ष थी। इसके अलावा अब किसी भी विषय के परिषदीय शिक्षक आवेदन कर सकेंगे। चयन प्रक्रिया से माइक्रो टीचिंग को समाप्त कर दिया गया है। अब केवल लिखित परीक्षा तथा साक्षात्कार के आधार पर चयन होगा। जिला स्तरीय चयन समिति पूरी प्रक्रिया का संचालन करेगी।
नई व्यवस्था निपुण भारत मिशन को बालवाटिका से कक्षा पांच तक प्रभावी ढंग से लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। एआरपी विद्यालयों में आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (एफएलएन), गतिविधि आधारित शिक्षण, टीएलएम के प्रभावी उपयोग, प्रिंट-रिच वातावरण और बेहतर कक्षा प्रबंधन को बढ़ावा देंगे। इसके साथ ही वे शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और डिजिटल संसाधनों के प्रभावी उपयोग में भी मार्गदर्शन देंगे।
सरकार ने एआरपी का कार्यकाल भी प्रदर्शन आधारित कर दिया है। नियमित मूल्यांकन के आधार पर ही कार्यकाल का विस्तार होगा। इससे शैक्षणिक नेतृत्व में जवाबदेही, प्रतिस्पर्धा और उत्कृष्टता को बढ़ावा मिलेगा। शासनादेश में एआरपी, एसआरजी और डायट मेंटर्स के लिए नियमित प्रशिक्षण एवं क्षमता संवर्धन कार्यक्रमों का भी प्रावधान किया गया है।
सरकार का मानना है कि ब्लॉक स्तर पर मजबूत अकादमिक सहयोग तंत्र विकसित होने से शिक्षकों को निरंतर मार्गदर्शन मिलेगा। विद्यार्थियों के अधिगम परिणाम बेहतर होंगे और प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लक्ष्य अधिक प्रभावी ढंग से हासिल किया जा सकेगा।






