
लखनऊ, 5 जुलाई 2026:
यूपी में राजस्व न्याय व्यवस्था को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में योगी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राजस्व परिषद ने फैसला किया है कि अब परिषद के न्यायालयों में मूल अभिलेखों के बजाय उनकी प्रमाणित पूर्ण स्कैन प्रतियों के आधार पर सुनवाई और कार्यवाही की जाएगी। राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल के निर्देश पर यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।
नई व्यवस्था लागू होने से अब मूल सरकारी अभिलेखों को बार-बार एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय भेजने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे महत्वपूर्ण दस्तावेजों के गुम होने, क्षतिग्रस्त होने और समय पर उपलब्ध न होने जैसी समस्याओं पर प्रभावी रोक लग सकेगी। इसके साथ ही न्यायिक प्रक्रिया भी अधिक तेज, सुरक्षित और व्यवस्थित बनेगी।
राजस्व परिषद ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अधीनस्थ न्यायालयों से भेजी जाने वाली स्कैन प्रतियों में हर पेज, आदेश पत्रक, नोटशीट, मानचित्र सहित सभी अभिलेख क्रमवार, स्पष्ट और पूर्ण रूप से शामिल हों। इसके साथ संबंधित राजस्व रिकॉर्ड कीपर का प्रमाण-पत्र संलग्न करना भी अनिवार्य होगा जिससे अभिलेखों की प्रामाणिकता और पारदर्शिता बनी रहे।

परिषद ने यह भी साफ किया है कि केवल विशेष परिस्थितियों में जब न्यायालय कारण दर्ज करते हुए आदेश देगा तभी मूल अभिलेख प्रस्तुत किए जाएंगे। भविष्य में इस पूरी प्रक्रिया को आरसीसीएमएस पोर्टल के माध्यम से पूरी तरह ऑनलाइन संचालित करने की तैयारी भी की जा रही है। इससे ई-गवर्नेंस को और मजबूती मिलेगी।
राजस्व परिषद ने सभी मंडलायुक्तों और डीएम को निर्देश दिए हैं कि नई व्यवस्था का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए। इसके साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि कोई अपूर्ण, अस्पष्ट या अप्रमाणित स्कैन प्रति भेजी गई तो संबंधित राजस्व रिकॉर्ड कीपर (आरआरके) के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। यह पहल प्रदेश की न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्था को डिजिटल, पारदर्शी और अधिक जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।






