लखनऊ, 20 जून 2026:
यूपी की राजधानी शहर-ए-लखनऊ की ऐतिहासिक पहचान और स्थापत्य वैभव का प्रतीक छतर मंजिल अब विश्व पर्यटन मानचित्र पर नई चमक के साथ उभरने की तैयारी में है। प्रदेश सरकार ने इसे विश्वस्तरीय हेरिटेज हॉस्पिटैलिटी डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू कर दी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत छतर मंजिल की मूल वास्तुकला, ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक पहचान को पूरी तरह संरक्षित रखते हुए अनुकूली पुनः उपयोग (एडेप्टिव रीयूज) के माध्यम से आधुनिक स्वरूप दिया जाएगा।
इसी क्रम में पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने छतर मंजिल का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने पर्यटन विकास और संरक्षण से जुड़े प्रस्तावित कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों एवं विशेषज्ञों के साथ विस्तृत चर्चा की। निरीक्षण के दौरान परियोजना की कार्ययोजना, संरक्षण मानकों और भविष्य की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।

प्रस्तावित परियोजना का उद्देश्य धरोहर संरक्षण और आधुनिक आतिथ्य सुविधाओं के बीच संतुलन स्थापित करना है। इसके तहत ऐसा पर्यटन केंद्र विकसित किया जाएगा जहां आगंतुकों को अवध के गौरवशाली इतिहास, अद्भुत स्थापत्य कला, पारंपरिक व्यंजनों, संगीत और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का एकीकृत अनुभव प्राप्त हो सके।
सरकार का प्रयास है कि विकास कार्यों के दौरान स्मारक की ऐतिहासिक भव्यता और मौलिक स्वरूप अक्षुण्ण रहे। इसके साथ ही पर्यटकों के लिए उच्च गुणवत्ता वाली सुविधाएं और सांस्कृतिक अनुभव विकसित किए जाएं। इससे इसका उपयोग दीर्घकालिक, सतत और पर्यटनोन्मुखी बन सकेगा।
लखनऊ की स्थापत्य विरासत के सबसे महत्वपूर्ण प्रतीकों में शामिल छतर मंजिल को धरोहर संरक्षण और एडेप्टिव रीयूज का राष्ट्रीय स्तर पर एक आदर्श मॉडल बनाने की दिशा में यह पहल मील का पत्थर साबित हो सकती है। इसके साकार होने पर राजधानी को नई पर्यटन पहचान मिलने के साथ अवध की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को भी वैश्विक मंच पर नई प्रतिष्ठा प्राप्त होगी।






