
लखनऊ/कानपुर, 3 सितंबर 2026:
कभी ‘पूर्व का मैनचेस्टर’ कहलाने वाला कानपुर अब देश के बड़े रक्षा निर्माण केंद्र के रूप में अपनी नई पहचान बनाने की तैयारी में है। यूपी को रक्षा उत्पादन का ग्लोबल हब बनाने के लिए योगी सरकार ने यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (यूपीडीआईसी) के अगले चरण की तैयारियां तेज कर दी हैं। कानपुर में आयोजित ‘कानपुर रीजनल डिफेंस वर्कशॉप’ में सरकार, सेना, उद्योग, एमएसएमई, शोध संस्थानों और नीति निर्माताओं ने मिलकर इस नए डिफेंस हब का रोडमैप तैयार किया।
ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) और प्रदेश सरकार की साझेदारी में हुई कार्यशाला में साफ संदेश दिया गया कि आने वाले समय में कानपुर सिर्फ रक्षा सामान बनाने का केंद्र नहीं अपितु डिजाइन, रिसर्च, डीप-टेक और नई तकनीक के विकास का बड़ा केंद्र भी बनेगा। इसके लिए आईआईटी कानपुर और बीएचयू जैसे संस्थानों की विशेषज्ञता को डिफेंस इंडस्ट्री से जोड़ा जाएगा।
डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि कानपुर में मजबूत इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग आधार पहले से मौजूद है। ऐसे में शहर में देश का बड़ा रक्षा निर्माण केंद्र बनने की पूरी क्षमता है। सांसद रमेश अवस्थी ने कहा कि डिफेंस कॉरिडोर यूपी को हथियारों और रक्षा उपकरणों के निर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।आईआईटी कानपुर और बीएचयू के सहयोग से विज्ञान, रिसर्च और नई तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा।
ओआरएफ के उपाध्यक्ष प्रो. हर्ष पंत ने कहा कि भारत अब रक्षा सामान के लिए आयात पर निर्भरता घटाकर देश में ही उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रहा है। उन्होंने बताया कि ओआरएफ की ‘स्ट्रैटेजिक उत्तर प्रदेश’ पहल का उद्देश्य रक्षा क्षेत्र से जुड़े सभी पक्षों को एक मंच पर लाना, यूपीडीआईसी में निवेश बढ़ाना और अलग-अलग शहरों में जाकर संभावनाओं को मजबूत करना है।
युवाओं को मिलेगी डिफेंस इंडस्ट्री की ट्रेनिंग
कार्यशाला में यूपी की बड़ी युवा आबादी को रक्षा उद्योग की जरूरतों के मुताबिक प्रशिक्षित करने पर विशेष जोर दिया गया। डेटम एडवांस्ड कंपोजिट्स के तन्मय तिवारी ने कहा कि कानपुर में बुनियादी ढांचे के साथ युवाओं के कौशल विकास पर तेजी से काम करना होगा। आईआईटी कानपुर और बीएचयू की रिसर्च का फायदा आईटीआई और स्थानीय संस्थानों तक पहुंचाया जाएगा। उद्योगों के सहयोग से ट्रेनिंग और इंटर्नशिप के जरिए रोजगार के साथ प्रदेश में मजबूत स्किल्ड डिफेंस वर्कफोर्स तैयार होगी।
एमएसएमई के लिए आसान होंगे टेस्ट और सर्टिफिकेशन
कानपुर के छोटे उद्योगों और एमएसएमई के सामने आने वाली टेस्टिंग, क्वालिटी चेक, ट्रायल और सर्टिफिकेशन की जटिलताओं को कम करने पर भी चर्चा हुई। भारतीय रक्षा निर्माता समाज के मेजर जनरल पीके सैनी ने बताया कि रक्षा खरीद प्रक्रिया में कई बदलाव किए गए हैं जिससे स्थानीय उद्योगों के लिए रक्षा उत्पादन में भागीदारी आसान होगी।
वर्कशॉप में ‘मेक इन इंडिया’ को अगले स्तर पर ले जाने के लिए सिर्फ विदेश से कलपुर्जे मंगाकर असेंबल करने के बजाय देश में ही डिजाइन, बौद्धिक संपदा (आईपी), सॉफ्टवेयर और अपग्रेड तकनीक विकसित करने पर जोर दिया गया।

विदेशी कंपनियों की भी कानपुर पर नजर
यूएस-इंडिया बिजनेस काउंसिल की उदया अरुण ने कहा कि उद्योग और निवेशक कानपुर को लेकर बेहद उत्साहित हैं। टीकेएमएस इंडिया के कमोडोर अनिल जय सिंह के मुताबिक भारत में काम कर रही विदेशी रक्षा कंपनियां देश के बड़े बाजार को देखते हुए इस क्षेत्र में अपनी भागीदारी बढ़ाना चाहती हैं।
डिफेंस टेक्नोलॉजी का फायदा आम उद्योगों को भी
इस पहल का असर सिर्फ रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। आईआईटी कानपुर के सहयोग से विकसित होने वाली ड्यूल-यूज और डीप-टेक तकनीकों का इस्तेमाल नागरिक उद्योगों और आम उत्पादों में भी किया जा सकेगा। इससे कानपुर के औद्योगिक और कारोबारी माहौल को नई गति मिलने की उम्मीद है।
कार्यशाला में बेहतर तालमेल के लिए कानपुर में अलग संस्थागत व्यवस्था बनाने पर भी सहमति बनी। अब अगली कार्यशाला झांसी में होगी और वर्ष के अंत में लखनऊ में बड़ा डिफेंस कॉन्क्लेव आयोजित किया जाएगा। इन्हीं बैठकों से निकली सिफारिशों के आधार पर यूपी को वैश्विक रक्षा उत्पादन के नक्शे पर मजबूती से स्थापित करने के लिए अंतिम नीतियां सामने आएंगी।






