
लखनऊ, 6 जुलाई 2026:
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार लखनऊ पहुंचे नितिन नबीन का दो दिवसीय दौरा केवल संगठनात्मक बैठक तक सीमित नहीं रहा अपितु आगामी चुनावों की रणनीति और राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर विपक्ष के खिलाफ आक्रामक राजनीतिक संदेश देने का मंच भी बन गया। सरकार और संगठन को पूरी तरह चुनावी मोड में सक्रिय करने के साथ उन्होंने साफ संकेत दिया कि भाजपा अब हर राजनीतिक और वैचारिक मुद्दे पर सीधे मुकाबले की रणनीति अपनाएगी।
राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों उपमुख्यमंत्रियों और अवध क्षेत्र के शक्ति केंद्र संयोजकों की मौजूदगी में नितिन नबीन ने राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण को विपक्ष की राजनीति से जोड़ते हुए तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि श्रीराम मंदिर भाजपा के लिए चुनावी मुद्दा नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि प्रभु श्रीराम की आस्था की रक्षा के लिए खून भी बहाना पड़े तो भाजपा पीछे नहीं हटेगी। मंदिर की आस्था के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा।

नबीन ने यह भी दोहराया कि चढ़ावा चोरी प्रकरण में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार सख्त कार्रवाई कर रही है और कानून अपना काम करेगा जबकि विपक्ष इस संवेदनशील विषय पर राजनीतिक रोटियां सेंकने में लगा है। उनके इस बयान को भाजपा की उस रणनीति के रूप में देखा जा रहा है जिसमें विपक्ष के आरोपों का जवाब भावनात्मक और वैचारिक दोनों स्तरों पर दिया जा रहा है।
उन्होंने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल का नाम लेकर कहा कि जो लोग कभी प्रभु श्रीराम के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे वही आज मंदिर की चिंता का दिखावा कर रहे हैं। उन्होंने कारसेवा आंदोलन, 500 वर्षों के संघर्ष और भाजपा, संघ तथा विहिप के बलिदान का उल्लेख करते हुए कहा कि इस इतिहास का मूल्य वे लोग कभी नहीं समझ सकते जिनकी राजनीति केवल समाज को बांटने पर आधारित रही है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर तक सक्रिय रहने का आह्वान करते हुए संगठन को चुनावी तैयारियों में पूरी ताकत झोंकने का संदेश दिया। उनके संबोधन में सरकार की उपलब्धियों के साथ वैचारिक मुद्दों को भी प्रमुखता मिली। इससे साफ संकेत मिला कि भाजपा आगामी चुनाव में विकास और हिंदुत्व दोनों को समानांतर राजनीतिक धार देने की तैयारी में है।
नितिन नबीन का यह दौरा स्पष्ट कर गया कि भाजपा संगठन को चुनावी मशीनरी की तरह सक्रिय करने के साथ राम मंदिर जैसे भावनात्मक मुद्दों पर भी आक्रामक रुख अपनाकर विपक्ष को राजनीतिक रूप से घेरने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। संगठनात्मक मजबूती और वैचारिक आक्रामकता के इस दोहरे संदेश ने उनके पहले लखनऊ दौरे को भाजपा की चुनावी राजनीति का महत्वपूर्ण पड़ाव बना दिया।






