Uttarakhand

बद्रीनाथ चढ़ावा प्रकरणः सियासत गरमाई, भैरव सेना संगठन व कांग्रेस ने जांच समिति पर उठाए सवाल

बीकेटीसी द्वारा गठित जांच समिति पर साधा निशाना, भैरव सेना संगठन के अध्यक्ष का दावा- चढ़ावे में कथित हेराफेरी की घटना सीसीटीवी फुटेज में कैद, समिति में एक भी साइबर विशेषज्ञ नहीं, सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में हो जांच

राजकिशोर तिवारी

देहरादून, 6 जुलाई 2026ः

बद्रीनाथ धाम में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित अनियमितता का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। शिकायतकर्ता भैरव सेना संगठन और कांग्रेस ने श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) द्वारा गठित जांच समिति की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए स्वतंत्र व न्यायिक जांच की मांग की है। भैरव सेना संगठन के अध्यक्ष संदीप खत्री ने दावा किया कि चढ़ावे में कथित हेराफेरी की घटना सीसीटीवी फुटेज में कैद है।

भैरव सेना संगठन के अध्यक्ष संदीप खत्री ने सोमवार को मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि बीकेटीसी की जांच समिति में एक भी साइबर विशेषज्ञ शामिल नहीं है, जबकि पूरा मामला सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल साक्ष्यों से जुड़ा है। उनका कहना था कि समिति के सभी सदस्य मंदिर समिति से जुड़े होने के कारण निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती। इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में कराई जानी चाहिए।
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उधर, उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों पर कथित अनियमितता के आरोप लग रहे हैं, उन्हीं से जुड़े लोगों को जांच समिति में शामिल करना न्याय और पारदर्शिता के सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि ऐसी समिति से निष्पक्ष और विश्वसनीय जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती। गोदियाल ने मांग की कि पूरे प्रकरण की जांच विधानसभा की संयुक्त समिति से कराई जाए, जिसकी अध्यक्षता नेता प्रतिपक्ष करें।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार इसके लिए तैयार नहीं है तो जांच प्रक्रिया की निगरानी उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश से कराई जाए। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के पास इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई का अवसर था, लेकिन सरकार की मंशा सवालों के घेरे में दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि जब मंदिर समिति के अध्यक्ष के निजी सहायकों पर ही आरोप लग रहे हों और उसी तंत्र से जुड़े लोगों को जांच समिति में शामिल किया जाए तो जांच की विश्वसनीयता स्वतः समाप्त हो जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस ऐसी जांच समिति की रिपोर्ट स्वीकार नहीं करेगी।

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