
लखनऊ, 8 जुलाई 2026:
लखनऊ शहर के विकास कार्यों में पारदर्शिता बढ़ाने और एक ही परियोजना पर अलग-अलग विभागों द्वारा टेंडर जारी होने जैसी गड़बड़ियों पर रोक लगाने के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने बड़ा कदम उठाया है। एलडीए अब विकास कार्यों की जीआईएस (Geographic Information System) टैगिंग लागू कर रहा है।इसके जरिए अवस्थापना निधि समेत विभिन्न मदों से होने वाले सभी विकास कार्यों का पूरा रिकॉर्ड महज एक क्लिक में उपलब्ध होगा।
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के निर्देश पर प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग सेल (पीएमसी) द्वारा जीआईएस पोर्टल पर विशेष मॉड्यूल तैयार किया जा रहा है। इसका करीब 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। मॉड्यूल लागू होने के बाद किसी भी विकास परियोजना की पूरी जानकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पहले से उपलब्ध रहेगी। इससे टेंडरों में डुप्लीकेसी की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी।
उपाध्यक्ष ने बताया कि पूर्व में ऐसे कई मामले सामने आए। उनमें नगर निगम और एलडीए ने एक ही कार्य के लिए अलग-अलग टेंडर जारी कर दिए थे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इस तरह की त्रुटियों पर प्रभावी रोक लगेगी और सभी विभाग एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर निर्णय ले सकेंगे।
जीआईएस टैगिंग के तहत हर विकास कार्य का पूरा विवरण दर्ज किया जाएगा। इसमें निर्माण कार्य शुरू होने की तिथि, निर्धारित पूर्णता अवधि, कार्यदायी संस्था, परियोजना की लागत और वर्तमान प्रगति जैसी सभी महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल होंगी। इसके साथ ही शहर के सभी जोनों में चल रहे विकास कार्यों का संपूर्ण लेखा-जोखा भी ऑनलाइन देखा जा सकेगा।
एलडीए ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में अवस्थापना निधि से कराए गए सभी विकास कार्यों की जीआईएस टैगिंग पूरी कर ली गई है। अब अन्य योजनाओं और परियोजनाओं का डेटा भी मॉड्यूल पर तेजी से अपडेट किया जा रहा है।

पोर्टल पर विकास कार्यों को अलग-अलग कलर कोड के माध्यम से टैग किया जाएगा। उपयोगकर्ता जिस वर्ष के कार्यों की जानकारी देखना चाहेंगे उस वर्ष के कलर कोड पर क्लिक करते ही संबंधित परियोजनाओं का पूरा विवरण स्क्रीन पर उपलब्ध हो जाएगा। एलडीए का मानना है कि यह तकनीक न केवल विकास कार्यों की निगरानी को आसान बनाएगी, बल्कि पारदर्शिता बढ़ाने, वित्तीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और विभागों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करने में भी अहम भूमिका निभाएगी।






