लखनऊ, 2 मई 2026:
यूपी में राजस्व मामलों के त्वरित निस्तारण को लेकर सीएम योगी की सख्त मॉनीटरिंग अब जमीनी स्तर पर असर दिखाने लगी है। सरकार की रणनीति और लगातार समीक्षा बैठकों के चलते राजस्व विवादों के निपटारे में उल्लेखनीय तेजी आई है।
राजस्व न्यायालय कंप्यूटरीकृत प्रबंधन प्रणाली (आरसीसीएमएस) की अप्रैल माह की रिपोर्ट के अनुसार पूरे प्रदेश में कुल 3,37,708 मामलों का निस्तारण किया गया।
इसमें राजधानी लखनऊ ने 18,861 मामलों का निस्तारण कर प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। डीएम विशाख जी के नेतृत्व में प्रशासनिक सक्रियता का असर साफ दिखाई दे रहा है। दूसरे स्थान पर प्रयागराज रहा जहां 12,036 मामलों का निस्तारण हुआ और बाराबंकी 9,139 मामलों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। आजमगढ़ ने 8,483 मामलों का निपटारा कर चौथा स्थान हासिल किया। आजमगढ़ के डीएम रविंद्र कुमार के मुताबिक जनशिकायतों के समयबद्ध समाधान और नियमित समीक्षा बैठकों से यह सफलता मिली है।
बरेली ने भी 8,483 मामलों का निस्तारण कर पांचवां स्थान प्राप्त किया, जबकि जौनपुर 8,274 मामलों के साथ छठे स्थान पर रहा। हालांकि, जनपद स्तरीय न्यायालयों में जौनपुर का प्रदर्शन सबसे दमदार रहा है। पिछले 16 महीनों से टॉप-5 में बने रहने के साथ इस बार भी जौनपुर ने प्रथम स्थान हासिल किया।
जौनपुर की पांच राजस्व न्यायालयों ने तय मानक 250 के मुकाबले 535 मामलों का निस्तारण कर 214 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की। वहीं डीएम न्यायालय ने 30 के मानक के मुकाबले 70 मामलों का निपटारा कर 233.33 प्रतिशत का रिकॉर्ड बनाया। इस श्रेणी में जौनपुर पूरे प्रदेश में पहले स्थान पर रहा। मऊ और मैनपुरी क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे।
सरकार का स्पष्ट फोकस राजस्व विवादों को प्राथमिकता पर सुलझाने, पारदर्शिता बढ़ाने और प्रशासनिक जवाबदेही तय करने पर है। यही वजह है कि अब जिलों के बीच बेहतर प्रदर्शन की प्रतिस्पर्धा भी देखने को मिल रही है। आम जनता को त्वरित न्याय दिलाने में अहम भूमिका निभा रही है।






