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दशहरी आम पर ‘कवच’ की ढाल… खास बैगिंग से आम महफूज, शौकीनों को मिलेगा असली जायका

मलिहाबाद के बागवानों को भा रहा पेपर बैग, दो से ढाई रुपए के बैग से कीटों पर लगाम, आम का रंग-रूप व मिठास बेहतर, ओलावृष्टि से घटते उत्पादन के बीच मिला सहारा, निर्यात लायक क्वालिटी पर फोकस

प्रमोद कुमार

मलिहाबाद (लखनऊ), 2 मई 2026:

मलिहाबाद के बागों में इस सीजन दशहरी आम को बचाने के लिए फ्रूट प्रोटेक्शन बैगिंग की रफ्तार तेज हो गई है। पेड़ों पर लगे छोटे फलों को कागज के खास बैग से ढक दिया जा रहा है, जिससे कीट-पतंगों, धूल और तेज धूप से सीधे बचाव हो सके। इससे आम की सेहत सुरक्षित रहती हैं वहीं इसे खाने वाले शौकीनों तक भी असली जायका पहुंचाने का मकसद पूरा हो रहा है।

बागवानों ने बताया कि बाजार में मिलने वाले पेपर बैग ₹2 से ₹2.50 तक में मिल रहे हैं। इन्हें फल पर लगाने से फल मक्खी, हॉपर जैसे कीटों का असर काफी कम हो जाता है। इसके चलते दवाओं का छिड़काव घट रहा है, जिसका सीधा फायदा आम खाने वालों की सेहत पर पड़ रहा है।

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बैगिंग का असर आम की क्वालिटी पर भी दिख रहा है। फल का रंग साफ और चमकदार हो रहा है, साइज बेहतर बन रहा है। मिठास में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है और टोटल सॉल्यूबल सालिड्स (TSS) स्तर सुधर रहा है, जिससे आम निर्यात के लिए ज्यादा उपयुक्त हो रहा है। कुछ बागवानों का कहना है कि पिछले सीजन में इसी तकनीक से उनकी आमदनी करीब दोगुनी तक पहुंच गई थी।

इस बार बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की वजह से उत्पादन में 60 से 70 फीसदी तक गिरावट की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में बैगिंग तकनीक फलों को गिरने से बचा रही है और जो फल पेड़ पर हैं उनकी गुणवत्ता बेहतर बनाए रख रही है।

बागवान बताते हैं कि बैगिंग से कई स्तर पर फायदा दिख रहा है। यह एक तरह का फिजिकल बैरियर बनकर कीटों को दूर रखता है। दवाओं का इस्तेमाल घटने से मिट्टी और पानी पर दबाव कम पड़ता है। बाजार में साफ-सुथरे और दाग रहित आम को प्रीमियम दाम मिल रहे हैं। वहीं ऐसे आम सामान्य आम के मुकाबले ज्यादा दिन तक सुरक्षित रह पा रहे हैं।

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