Uttarakhand

अक्टूबर तक नए छात्रावास, 9.80 लाख लोगों के खातों में पेंशन, धामी ने दिया Auto Approval का रोडमैप

समाज कल्याण विभाग की समीक्षा में 25 साल की जरूरतों के हिसाब से योजनाएं बनाने के निर्देश, 60 साल पूरे होते ही स्वतः वृद्धावस्था पेंशन देने की तैयारी, योजनाओं के Integration और वित्तीय अनुशासन पर भी जोर

देहरादून, 8 जुलाई 2026:

उत्तराखंड सरकार समाज कल्याण से जुड़ी योजनाओं को नए तरीके से तैयार करने की दिशा में काम शुरू कर रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि विभाग की सभी योजनाएं सिर्फ मौजूदा जरूरतों को देखकर नहीं, बल्कि अगले 25 वर्षों को ध्यान में रखकर बनाई जाएं। उनका कहना था कि ऐसी व्यवस्था तैयार हो जो लंबे समय तक असरदार रहे और दूसरे राज्यों के लिए भी एक बेहतर मॉडल बन सके।

मुख्यमंत्री ने समाज कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक में सबसे पहले बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना की प्रोग्रेस पर फोकस किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि डोईवाला (देहरादून), पाइनस (नैनीताल) और सोमेश्वर (अल्मोड़ा) में बन रहे बाबू जगजीवन राम छात्रावास हर हाल में अक्टूबर तक तैयार कर दिए जाएं। उनका कहना था कि अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं को जल्द बेहतर रहने और पढ़ाई का माहौल मिलना चाहिए।

बैठक में मुख्यमंत्री ने समाज कल्याण विभाग की विभिन्न Pension Schemes की जून 2026 की किस्त भी DBT के जरिए वन क्लिक से जारी की। इस दौरान राज्य के 9,80,950 लाभार्थियों के बैंक खातों में 145.42 करोड़ रुपये सीधे ट्रांसफर किए गए। इसमें केंद्र सरकार का करीब 7.02 करोड़ रुपये और राज्य सरकार का लगभग 138.40 करोड़ रुपये का योगदान रहा।
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जून महीने की पेंशन राशि में सबसे बड़ा हिस्सा वृद्धावस्था पेंशन का रहा। 6,11,245 लाभार्थियों को 91.69 करोड़ रुपये मिले। इसके अलावा 2,35,850 विधवा पेंशन लाभार्थियों के खातों में 35.38 करोड़ रुपये भेजे गए। 88,787 दिव्यांग लाभार्थियों को 13.32 करोड़ रुपये, 27,207 किसान पेंशन लाभार्थियों को 3.26 करोड़ रुपये, 8,258 परित्यक्ता महिलाओं को 99.10 लाख रुपये, 7,297 लोगों को भरण-पोषण अनुदान के रूप में 51.08 लाख रुपये, 2,179 लाभार्थियों को तीलू रौतेली पेंशन के तहत 26.15 लाख रुपये और 127 बौना पेंशन लाभार्थियों को 1.52 लाख रुपये की सहायता दी गई।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि अलग-अलग योजनाओं का बेहतर Integration किया जाए ताकि संसाधनों का सही इस्तेमाल हो और लोगों को अधिक सुविधा मिल सके। उन्होंने वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के साथ निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और समयसीमा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश भी दिए।
बैठक में मुख्यमंत्री ने एक अहम प्रस्ताव पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा कि जैसे ही कोई पात्र नागरिक 60 वर्ष की आयु पूरी करे, उसे स्वतः वृद्धावस्था पेंशन का लाभ मिलना चाहिए। इसके लिए लोगों को बार-बार आवेदन या दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें और पूरी प्रक्रिया ज्यादा आसान बनाई जाए।

समीक्षा के दौरान बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना की जानकारी भी दी गई। इस योजना के तहत अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं को माध्यमिक, उच्च और विश्वविद्यालय स्तर की पढ़ाई के लिए छात्रावास सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। केंद्र सरकार प्रति छात्र 3.25 लाख रुपये तक की सहायता देती है। जरूरत पड़ने पर राज्य सरकार अतिरिक्त टॉप-अप राशि देकर आधुनिक छात्रावासों का निर्माण कराती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का मकसद सिर्फ योजनाएं शुरू करना नहीं बल्कि ऐसी व्यवस्था तैयार करना है जो आने वाली पीढ़ियों की जरूरतों को भी पूरा करे। उन्होंने सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा और सम्मान को हर पात्र नागरिक का अधिकार बताते हुए अधिकारियों से उत्तराखंड को सुशासन का ऐसा मॉडल बनाने को कहा जिसे दूसरे राज्य भी अपनाने की कोशिश करें। बैठक में कैबिनेट मंत्री खजान दास, समाज कल्याण विभाग के सचिव और विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

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